होम ट्रंप का बड़ा ऐलान, युद्ध के बाद बदले समीकरण, अब ईरान के साथ मिलकर काम करेगा अमेरिका
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब रिश्तों में नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। दो हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देश अब बेहद करीब से मिलकर काम करेंगे।
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब रिश्तों में नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। दो हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देश अब बेहद करीब से मिलकर काम करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान एक “सफल सत्ता परिवर्तन (Regime Change)” के दौर से गुजर चुका है। ट्रंप के अनुसार अब ईरान में यूरेनियम संवर्धन (uranium enrichment) नहीं किया जाएगा और अमेरिका, ईरान के साथ मिलकर भूमिगत परमाणु सामग्री को बाहर निकालने की प्रक्रिया में सहयोग करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि पूरे क्षेत्र पर कड़ी सैटेलाइट निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी गतिविधि पर नजर रखी जा सके। उनके मुताबिक हमलों के बाद से संबंधित साइट पर किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं देखी गई है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच टैरिफ और प्रतिबंधों में राहत को लेकर बातचीत जारी है और 15 में से कई बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है।
इस बीच चीन ने भी मिडिल ईस्ट की स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Mao Ning ने कहा कि चीन क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल है। उन्होंने कहा कि चीन लगातार संघर्ष-विराम (ceasefire) और बातचीत को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है और खाड़ी क्षेत्र सहित पूरे मिडिल ईस्ट में स्थिरता बहाल करने में “रचनात्मक भूमिका” निभाता रहेगा।
चीन की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि चीन ने Iran को बातचीत की मेज पर लाने में मदद की है। चीन का यह रुख संकेत देता है कि वह खुद को एक मध्यस्थ (mediator) और संतुलनकारी शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है, खासकर तब जब United States, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सफल होता है तो वैश्विक कूटनीति में उसकी स्थिति और मजबूत हो सकती है। साथ ही यह पहल युद्ध जैसे हालात को शांत करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
करीब 40 दिनों तक चले अमेरिका-इजरायल और ईरान के सैन्य संघर्ष के बाद बुधवार सुबह अगले दो हफ्तों के लिए सीजफायर का ऐलान किया गया। माना जा रहा है कि इस समझौते में चीन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विश्लेषकों के अनुसार यदि स्थिति स्थिर रहती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से वैश्विक ऊर्जा संकट कम हो सकता है और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर भी विराम लग सकता है।
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