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समाचारदेशराजनीति Alert Star Digital Team Apr 6, 2026 09:57 PM

CEC पर महाभियोग की कोशिश फेल, ज्ञानेश कुमार को राहत, विपक्ष भड़का: डेरेक ओ’ब्रायन बोले संसद का मजाक

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्ष की कोशिश को बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा के सभापति ने उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, वहीं लोकसभा स्पीकर ने भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

CEC पर महाभियोग की कोशिश फेल, ज्ञानेश कुमार को राहत, विपक्ष भड़का: डेरेक ओ’ब्रायन बोले संसद का मजाक

Impeachment Motion Against CEC: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्ष की कोशिश को बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा के सभापति ने उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, वहीं लोकसभा स्पीकर ने भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।

दरअसल, 193 सांसदों — जिनमें लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सदस्य शामिल थे — ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे। यह नोटिस 12 मार्च 2026 को राज्यसभा सभापति को सौंपा गया था। आजादी के बाद किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में यह पहला ऐसा प्रयास माना जा रहा था।

कानूनी प्रावधानों के तहत दिया गया था नोटिस

महाभियोग प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) के साथ-साथ Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023 और Judges (Inquiry) Act, 1968 के प्रावधानों के तहत प्रस्तुत किया गया था। विपक्षी सांसदों ने ज्ञानेश कुमार पर पक्षपातपूर्ण आचरण और चुनावी प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए थे।

राज्यसभा सभापति ने नोटिस और उससे जुड़े सभी तथ्यों की समीक्षा करने के बाद इसे आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना। इसी के साथ महाभियोग की प्रक्रिया शुरुआती स्तर पर ही रुक गई।

विपक्ष के आरोप क्या थे

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर कुल सात गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें ‘पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण’, ‘सिद्ध कदाचार’, ‘चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना’ और ‘बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करना’ जैसे आरोप शामिल थे।

विशेष रूप से बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि इस प्रक्रिया के कारण कई मतदाता अपने अधिकार से वंचित हो गए। विपक्ष ने अपने आरोपों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला भी दिया था।

नोटिस खारिज होने पर विपक्ष का हमला तेज

महाभियोग प्रस्ताव खारिज होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, 'राज्यसभा सांसदों द्वारा मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की याचिका खारिज कर दी गई. कारण? कोई कारण नहीं बताया गया. बीजेपी हमारी महान संसद का मजाक उड़ाती रहती है. शर्मनाक!'

उन्होंने आगे कहा, 'मुख्य आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव 12 मार्च को राज्यसभा में पेश किया गया था. इसी मुद्दे पर लोकसभा में एक अलग याचिका भी पेश की गई थी. संसद 2 अप्रैल तक चली. दोनों याचिकाओं को संसद में पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया. भाजपा अब अपने ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए कौन सी कुटिल चाल चल रही है?'

इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि फिलहाल ज्ञानेश कुमार अपने पद पर बने रहेंगे, जबकि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और संसदीय स्तर पर आगे भी संघर्ष जारी रखने के संकेत दे रहा है।

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