होम पुलिस की कथित मिलीभगत से रोक के बावजूद हनुमत धाम के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण, घरों में घुसा पानी; खतरे के निशान के करीब नदियां
नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदियां खतरे के निशान के बराबर बहे रही हैं। सदर तहसील का लोधीपुर, परशुरामपुरी के 19 और कलान तहसील के 9 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। 261 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
शाहजहांपुर। नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदियां खतरे के निशान के बराबर बहे रही हैं। सदर तहसील का लोधीपुर, परशुरामपुरी के 19 और कलान तहसील के 9 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। 261 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। खननौद नदी से लोधीपुर मोहल्ला चपेट में है। घरो तक पानी पहुंच गया है। हनुमतधाम की कई सीढियों तक पानी आ गया। लोधीपुर में डूब क्षेत्र में बने मकानों तक पानी पहुंच गया। यहां से तीन दिन पहले 17 परिवारों का रेस्क्यू किया गया था। हालांकि प्रशासन की भी लापरवाही ये सामने आई कि जब डूब क्षेत्र में निर्माण होता है तो अधिकारी लापरवाह बने रहते हैं। जिसका खामियाजा बाढ़ के समय लोगों को भुगतना पड़ता है।
दरअसल शाहजहांपुर में तीन तहसीलों के 29 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इसमे खननौद नदी का जलस्तर बढ़ने से मोहल्ला लोधीपुर चपेट में आया है। हालांकि अभी तक वही मकान बाढ़ की चपेट में आए हैं जो डूब क्षेत्र में बने हैं। गंगा नदी खतरे के निशान के लेवल पर है। इस नदी के बढे़ जलस्तर से कलान तहसील के 9 गांव चपेट में हैं। जिनमे पैलानी उत्तर, गुटेटी उत्तर, परौर, दहेलिया, चौरा बगर खेत, कीलापुर कला, नवादा तालुका बानगांव, पूरनपुर और हैदलपुर गांव शामिल है। रामगंगा नदी भी खतरे के निशान के लेबल पर है। इस नदी से परशुरामपुरी तहसील के 19 गांव चपेट में आए हैं। खननौत नदी भी खतरे के निशान के बराबर है। इस नदी की चपेट में सदर तहसील का लोधीपुर मोहल्ला चपेट में आया है। यहां से तीन दिन पहले 17 परिवारों का रेस्क्यू किया गया था। उनको आश्रय स्थल पर पनाह दी गई और कुछ परिवार अपने रिश्तेदारों के घर चले गये । गर्रा नदी भी खतरे के निशान के बराबर बहे रही है। बुधवार की रात करीब आठ बजे इसमे दियूनी बैराज से करीब 9 हजार क्यूसेक पानी पास किया गया।

प्रशासन ने बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी हैं। गोताखोरों की तैनात कर दिए हैं। 12 मेडिकल टीमे लगाई गई। नाव और मोटरवोट की व्यवस्था की गई। बाढ़ शरणालय खोले गये ।जिसमे 150 लोग रहे रहे हैं। इतने ही प्रशासन ने सुरक्षित स्थानो तक पहुंचाएं।
पिछरी बार आई बाढ़ से गर्रा नदी के आसपास क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। ककरा पुल से बाढ़ का पानी टकराकर कालोनियों में घुसा, ऐसा प्रशासन की जांच में आया था। तभी ककरा पुल को 80 सेंटीमीटर उंचा किया गया। जिसमे सवा चार करोड़ रुपये खर्च आया था। पिछली बार आई बाढ़ का पानी राजकीय मेडिकल कालेज के वार्डो, एसएस कालेज के क्लास, कई कालोनियों और हाइवे तक आ गया था।
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