होम TMC पर EC के फैसले से विपक्ष में हलचल! Rahul Gandhi से Akhilesh तक Mamata के समर्थन में, 5 Points में समझें पूरा मामला
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी विधानसभा उपचुनाव में ‘All India Trinamool Congress’ नाम और उसके ‘Flowers & Grass’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। दोनों गुटों से नए नाम और नए फ्री सिंबल के विकल्प मांगे गए हैं।
चुनाव आयोग के मुताबिक दोनों गुट पार्टी पर अपना दावा कर रहे हैं और इस विवाद पर अंतिम फैसला Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत विस्तृत प्रक्रिया के बाद लिया जाना है। फिलहाल यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू है।
चुनाव आयोग के फैसले के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ममता बनर्जी के समर्थन में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के मामलों में एक जैसा पैटर्न देखने को मिल रहा है।
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं है. यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है. पहले शिवसेना, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब तृणमूल कांग्रेस. हर बार एक ही पैटर्न, भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं. फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है.'
उन्होंने इस घटनाक्रम को ‘वोट चोरी’, ‘सरकार चोरी’ और अब ‘पार्टी चोरी’ से जोड़ते हुए चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग के आदेश में कहा गया है कि दोनों गुटों के दावे पर अंतिम निर्णय के लिए आगे की प्रक्रिया जरूरी है।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने भी चुनाव आयोग के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को CEC ज्ञानेश कुमार की ओर से जन्मदिन का तोहफा बताया और आयोग पर BJP के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया।
वेणुगोपाल ने एक्स पर लिखा, 'यह मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की ओर से मोदी जी को देर रात दिया गया जन्मदिन का तोहफा है. चुनाव आयोग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बीजेपी के हाथों की कठपुतली के अलावा और कुछ नहीं है.'
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने भी TMC के मौजूदा विवाद को लेकर ममता बनर्जी का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'इस पार्टी को ममता बनर्जी ने अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के साथ बनाया था. तृणमूल कांग्रेस का राज्य और देश की राजनीति में अहम योगदान रहा है. जिस तरह शिवसेना बाला साहेब ठाकरे की पार्टी रही है, वैसे ही तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी की पार्टी है.'
वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, 'चुनाव आयोग लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने के लिए फैसले ले तो उसके मान-सम्मान में वृद्धि होगी. और कुछ नहीं कहना है, बस इतना पूछना है कि हमारे द्वारा इलेक्शन कमीशन में जमा किये गये एफिडेविट मिले क्या?'
इन प्रतिक्रियाओं के बीच यह जरूर स्पष्ट है कि अलग-अलग विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं। इसे इंडिया गठबंधन की एकजुटता के रूप में देखना एक राजनीतिक व्याख्या है, जबकि नेताओं के बयानों और उनके रुख को तथ्य के तौर पर अलग-अलग देखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में उपचुनाव होने वाले हैं। आयोग के सामने एक तरफ ममता बनर्जी का गुट है, जबकि दूसरी तरफ प्रतिद्वंद्वी गुट है। आयोग ने दोनों पक्षों को नए पार्टी नाम और फ्री चुनाव चिन्ह के विकल्प देने को कहा है।
मौजूदा व्यवस्था का उद्देश्य चुनाव से पहले दोनों दावेदार गुटों को समान स्थिति में रखना और विवादित नाम व चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल को रोकना है। TMC के पुराने नाम और ‘Flowers & Grass’ चिन्ह पर अंतिम अधिकार किस गुट का होगा, इसका फैसला आगे की चुनाव आयोग की प्रक्रिया के बाद होगा।
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