‘एक ही छत के नीचे हो . अब सब धर्मों की प्रार्थना’
इस प्यारी पृथ्वी को बचाने के लिए विश्व संसद जरूरी
विज्ञान और धर्म अलग नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं!
जो निरंतर जीवंत, नवीन तथा युगानुकूल है, वही ईश्वर है, अल्ला है, गॉड है, वाहे गुरू है!
‘वैलेन्टाइन दिवस’ को ‘पारिवारिक एकता दिवस’ के रूप में मनायें!
हमें मानवतावादी विश्व नागरिक तैयार करने होंगे!- डॉ जगदीश गाँधी
संघर्ष जीवन का सबसे बड़ा वरदान!