होम ट्रंप को ईरान का सख्त अल्टीमेटम, 10 शर्तों के बिना नहीं होगी डील, दोबारा हमला करने का मौका नहीं देंगे
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले माहौल बेहद संवेदनशील हो गया है। वार्ता से पहले ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट चेतावनी देते हुए अपनी शर्तें सामने रख दी हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले माहौल बेहद संवेदनशील हो गया है। वार्ता से पहले ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट चेतावनी देते हुए अपनी शर्तें सामने रख दी हैं। ईरान ने साफ कहा है कि वह ऐसी किसी भी डील को स्वीकार नहीं करेगा, जिससे दुश्मनों को फिर से हथियार उठाने का मौका मिले।
ईरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस बार की बातचीत केवल उसके तय किए गए 10 प्रमुख बिंदुओं पर ही आधारित होगी। ईरान के उपविदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने कहा कि जब तक सीजफायर की पुख्ता गारंटी नहीं मिलती, तब तक किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे।
'प्रेस टीवी' की रिपोर्ट के मुताबिक तख्त-रवांची ने कहा,
'ईरान ऐसा सीजफायर नहीं चाहता जो दुश्मन को फिर से हथियार जुटाने और फिर से हमला करने का मौका दे दे. ईरान इस बात पर जोर देता है कि किसी भी समझौते के बाद दोबारा अटैक न हो और इसकी गारंटी मिलनी चाहिए. ईरान के दस पॉइंट्स वाले प्रस्ताव को वार्ता के आधार के रूप में स्वीकार कर लिया गया है. ईरान कूटनीति और बातचीत का समर्थन करता है, लेकिन गलत सूचनाओं पर आधारित वार्ता या किसी भी ऐसी प्रक्रिया को अस्वीकार करता है.'
ईरान ने बातचीत के एजेंडे में लेबनान के मुद्दे को भी शामिल किया है। करीब 40 दिनों बाद हुए सीजफायर के बावजूद वहां हालात सामान्य नहीं हैं और इजरायल की ओर से लगातार हमलों की खबरें सामने आती रही हैं। ईरान का कहना है कि लेबनान को भी इस सीजफायर समझौते का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
शांति वार्ता से पहले अमेरिका ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के इस्लामाबाद पहुंचने से पहले अमेरिकी वायुसेना के पांच विमान रावलपिंडी के नूरखान एयरबेस पर उतर चुके हैं।
इनमें से दो विमानों से सीक्रेट सर्विस और सुरक्षा अधिकारी पहुंचे, जबकि अन्य तीन विमानों के जरिए सुरक्षा काफिले की 10 शेवरलेट सबअर्बन SUV गाड़ियां, तीन हेलीकॉप्टर, जैमिंग उपकरण और अन्य जरूरी सुरक्षा संसाधन भेजे गए हैं।
इस सख्त रुख और कड़ी शर्तों के बीच यह देखना अहम होगा कि इस्लामाबाद में होने वाली यह वार्ता किसी ठोस नतीजे तक पहुंचती है या फिर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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