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समाचारविदेश Alert Star Digital Team Apr 10, 2026 08:33 PM

ईरान-अमेरिका टॉक्स से पहले बड़ा वार्निंग गेम, जेडी वेंस का सख्त संदेश-अबकी बार चाल चली तो जवाब मिलेगा

ईरान और अमेरिका के बीच स्थायी शांति की दिशा में इस्लामाबाद में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले माहौल गर्म हो गया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान रवाना हो चुके हैं।

ईरान-अमेरिका टॉक्स से पहले बड़ा वार्निंग गेम, जेडी वेंस का सख्त संदेश-अबकी बार चाल चली तो जवाब मिलेगा

ईरान और अमेरिका के बीच स्थायी शांति की दिशा में इस्लामाबाद में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले माहौल गर्म हो गया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान रवाना हो चुके हैं। उन्होंने जहां बातचीत को लेकर सकारात्मक उम्मीद जताई, वहीं ईरान को सख्त संदेश भी दिया। वेंस ने बताया कि इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत के लिए उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले हैं और टीम रचनात्मक वार्ता के लिए तैयार है।

जेडी वेंस की दो टूक चेतावनी

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा,
'हम बातचीत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. मुझे लगता है कि यह सकारात्मक होगी, जैसा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी कहा है. अगर ईरानी लोग सद्भावना के साथ बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम निश्चित रूप से उनकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने को तैयार हैं. अगर वे हमारे साथ चाल चलने की कोशिश करेंगे तो उन्हें पता चल जाएगा कि हमारी बातचीत करने वाली टीम इतनी नरम नहीं है.'

युद्धविराम के बाद इस्लामाबाद बना हाई सिक्योरिटी जोन

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम पर सहमति बनी है। इसी के बाद अब दोनों देशों के बीच मतभेद सुलझाने और शांति को स्थायी रूप देने के लिए इस्लामाबाद में बैठक आयोजित की जा रही है।
बैठक से पहले पाकिस्तान की राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 10 अप्रैल 2026 को सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई और 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। शहर में असामान्य सन्नाटा है, आम गतिविधियां सीमित कर दी गई हैं और कई इलाकों में आवाजाही पर रोक जैसी स्थिति बनी हुई है।

सीजफायर के बीच भरोसे पर उठे सवाल

हालिया घटनाओं ने इस पूरे समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इजरायल द्वारा लेबनान पर हमले और सैकड़ों लोगों के मारे जाने के दावे, साथ ही अमेरिका के कुछ बयानों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि हिज्बुल्लाह को लेकर समझौते में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जबकि पाकिस्तान का दावा था कि यह इसका हिस्सा था।

वार्ता के भविष्य को लेकर संशय

पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ी चुनौती दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है। ईरान के भीतर भी इस बात को लेकर संदेह है कि क्या यह वार्ता किसी ठोस नतीजे तक पहुंचेगी या फिर केवल तनाव को अस्थायी रूप से टालने का प्रयास साबित होगी।

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