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समाचारराजनीतिप्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Apr 9, 2026 09:11 PM

लखनऊ को मिलेगा नया अंबेडकर स्मारक, दलित विरासत को सशक्त करने की दिशा में BJP का बड़ा कदम

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नई सियासी हलचल देखने को मिल रही है। संविधान और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

लखनऊ को मिलेगा नया अंबेडकर स्मारक, दलित विरासत को सशक्त करने की दिशा में BJP का बड़ा कदम

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नई सियासी हलचल देखने को मिल रही है। संविधान और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा डॉ. अंबेडकर के नाम पर मेमोरियल और कल्चरल सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। इससे पहले बहुजन समाज पार्टी की सरकार के दौरान भी अंबेडकर स्मारक बनाया गया था, ऐसे में बीजेपी के इस कदम को सीधे चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

ऐशबाग में बन रहा भव्य अंबेडकर स्मारक

लखनऊ के ऐशबाग क्षेत्र में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मारक और सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 5,493.52 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित की जा रही है। इसकी आधारशिला वर्ष 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने विधानसभा चुनाव से पहले रखी थी। शुरुआत में इस परियोजना के लिए 45 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था, लेकिन विस्तार के बाद इसकी लागत बढ़कर करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

बीजेपी के फैसले से समर्थक भी चौंके

बीजेपी के इस निर्णय ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ पार्टी समर्थकों को भी हैरान कर दिया है। वजह यह है कि अतीत में पार्टी ने ऐसे स्मारकों के निर्माण का विरोध किया था, जबकि अब उसी मॉडल पर बड़ा प्रोजेक्ट तैयार कराया जा रहा है। इस बदलाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

नए स्मारक की खासियत क्या होगी

बीजेपी सरकार द्वारा बनाए जा रहे इस स्मारक को पहले से मौजूद स्मारक से अलग स्वरूप दिया जा रहा है। परिसर में डॉ. अंबेडकर की 25 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी और आसपास के क्षेत्र का व्यापक सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। इसके अलावा स्मारक परिसर में ऑडिटोरियम, लाइब्रेरी, रिसर्च सेंटर और शोधकर्ताओं के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार की योजना के अनुसार 2027 से पहले जुलाई माह में इसका उद्घाटन कर दिया जाएगा।

एक ही शहर में दूसरा अंबेडकर स्मारक

दिलचस्प बात यह है कि लखनऊ शहर में यह अंबेडकर के नाम पर बनने वाला दूसरा बड़ा स्मारक होगा। इससे पहले बसपा सरकार के दौरान अंबेडकर स्मारक का निर्माण कराया गया था। अब बीजेपी सरकार द्वारा नया स्मारक बनवाए जाने को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसे दलित मतदाताओं तक पहुंच मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

अंबेडकर स्मारक के पीछे चुनावी गणित

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार 2022 चुनाव से पहले भूमिपूजन और 2027 चुनाव से पहले उद्घाटन की टाइमिंग बीजेपी की रणनीति को दर्शाती है। पार्टी इस परियोजना के जरिए खुद को दलित हितैषी के रूप में स्थापित करना चाहती है और दलित वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। जानकारी के मुताबिक बीजेपी ने यह रणनीतिक कदम 2024 लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद उठाया है, जहां बड़ी संख्या में दलित मतदाताओं ने विपक्षी दलों का समर्थन किया था।

दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश

2014 के बाद बसपा के कमजोर होने के साथ दलित मतदाताओं का झुकाव बीजेपी की ओर बढ़ा था और 2017 व 2022 के विधानसभा चुनाव में इसका असर भी देखने को मिला। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान संविधान और आरक्षण से जुड़े मुद्दों ने राजनीतिक माहौल बदल दिया, जिसके चलते दलित मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग विपक्ष की ओर चला गया।

इस बदलाव का असर चुनावी नतीजों में भी दिखा, जहां समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 36 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस को छह सीटें मिलीं और बीजेपी दूसरे स्थान पर पहुंच गई। अब पार्टी चुनाव से पहले अंबेडकर स्मारक को जनता के लिए खोलकर दलित समुदाय के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश में जुटी है।

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