होम होर्मुज पर टकराव बढ़ा, US-चीन आमने-सामने आए तो किस देश की अर्थव्यवस्था होगी सबसे ज्यादा तबाह?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात तेजी से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन का एक तेल टैंकर अमेरिकी नाकाबंदी के बावजूद इस अहम समुद्री रास्ते से गुजर गया। इससे अमेरिका और चीन के बीच टकराव की स्थिति और गहरा गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात तेजी से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन का एक तेल टैंकर अमेरिकी नाकाबंदी के बावजूद इस अहम समुद्री रास्ते से गुजर गया। इससे अमेरिका और चीन के बीच टकराव की स्थिति और गहरा गई है।
चीन ने साफ संकेत दिया है कि वह अमेरिकी फैसलों को मानने के मूड में नहीं है, जिससे वैश्विक स्तर पर बड़े भू-राजनीतिक संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रूट्स में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर यहां कोई रुकावट आती है, तो इसका असर सिर्फ खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
इस संभावित टकराव में सबसे ज्यादा जोखिम चीन को माना जा रहा है।
चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है और उसकी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 40% से 50% हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर करता है।
उसके कच्चे तेल का करीब आधा और एलएनजी का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। इसके अलावा ईरान के तेल निर्यात का लगभग 90% हिस्सा चीन को जाता है। ऐसे में अगर नाकाबंदी सख्त होती है, तो चीन के उद्योग, परिवहन और आर्थिक विकास पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में ईरान भी बड़े नुकसान की चपेट में आ सकता है। उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल निर्यात पर निर्भर है और यह निर्यात मुख्य रूप से इसी मार्ग से चीन तक पहुंचता है।
नाकाबंदी की स्थिति में ईरान के लिए तेल बेचना और जरूरी सामान आयात करना बेहद मुश्किल हो सकता है, जिससे उसकी पहले से दबाव में चल रही अर्थव्यवस्था और कमजोर पड़ सकती है।
भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात पर निर्भर हैं। हालांकि फिलहाल भारत पर सीधा असर सीमित रहने की संभावना है, लेकिन अगर तनाव बढ़ता है तो वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे इन देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।
संयुक्त राज्य अमेरिका की स्थिति अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है। अमेरिका खुद एक बड़ा तेल उत्पादक है और उसे इस क्षेत्र से कम आयात करना पड़ता है।
फिर भी वैश्विक आर्थिक मंदी, बढ़ती महंगाई और बाजार में अस्थिरता जैसे कारक अमेरिका को भी प्रभावित कर सकते हैं।
अगर अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेगा। यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकता है, लेकिन मौजूदा हालात में सबसे बड़ा झटका चीन और ईरान को लगने की संभावना ज्यादा है।
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।