होम बातचीत भी, घेराबंदी भी! ट्रंप का ईरान पर थ्री-वे अटैक, क्या जंग के करीब पहुंची दुनिया?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। भले ही दोनों देशों के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत चल रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ समझौते की बातचीत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति भी तेज कर दी है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। भले ही दोनों देशों के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत चल रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ समझौते की बातचीत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति भी तेज कर दी है।
विदेश मामलों के जानकार रॉबिंदर सचदेव के मुताबिक, ट्रंप इस समय “थ्री-वे अटैक” की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
पहला, पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाकर ईरान से बातचीत जारी रखना।
दूसरा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दबाव बनाकर ईरान की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना।
तीसरा, रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक अहम कड़ी बनकर उभरा है। पाकिस्तानी डेलीगेशन इस समय ईरान के दौरे पर है। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ से मुलाकात की।
इसके अलावा उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री और अन्य नेताओं से भी बातचीत की। पाकिस्तान लगातार अमेरिका और ईरान के बीच सुलह कराने की कोशिश कर रहा है, हालांकि अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
इससे पहले इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी। इस बैठक के बाद ट्रंप ने कहा था कि कई मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन परमाणु हथियार का मुद्दा अब भी अटका हुआ है।
ईरान यूरेनियम एनरिचमेंट के अपने कार्यक्रम पर अड़ा हुआ है, जबकि ट्रंप इसको लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने साफ कहा था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा।
इस्लामाबाद में बातचीत बेनतीजा रहने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से वार्ता हो सकती है। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि बातचीत और दबाव की यह दोहरी रणनीति आगे भी जारी रह सकती है।
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