होम प्रियंका वाड्रा जिस तेजी से मुस्लिमों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं वह अखिलेश के लिए नुकसानदेह है
प्रियंका वाड्रा जिस तेजी से मुस्लिमों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं वह अखिलेश के लिए नुकसानदेह है
हाल के दिनों में लगातार तीन बार कांग्रेस के लिए संकट मोचक की भूमिका निभा चुकीं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी पर उत्तर प्रदेश के कांग्रेसियों का भरोसा बढ़ता जा रहा है। उन्हें लग रहा है कि उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों में वे पार्टी को कम से कम ऐसी स्थिति में लाने में जरूर कामयाब होंगी, जिसे सम्मानजनक कहा जा सके। पार्टी के एक पूर्व महासचिव कहते हैं कि प्रियंका समझदार हैं। उन्होंने जिस तरह पहले राजस्थान, फिर पंजाब और अब उत्तराखंड में रणनीतिक कौशल का परिचय दिया है, उससे लगता है कि वे राजनीति और जमीनी हकीकत को तो समझती ही हैं, बल्कि पार्टी नेताओं के मानस को भी समझती हैं।हालांकि सवाल यह है कि क्या अपने रूठे नेताओं को मना लेना वोट हासिल करने की भी गारंटी हो सकता है? सामान्यतया ऐसी तुलना अटपटा लग सकती है, लेकिन कांग्रेस के नेता मानते हैं कि प्रियंका में इतनी समझ है कि वे वोटरों को भी लुभा सकती हैं। हालांकि भारतीय जनता पार्टी के नेता इसे दूर की कौड़ी बता रहे हैं।
हाल ही में उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने एक तरह से बागी रुख अख्तियार कर लिया था। उन्होंने ट्वीटर के जरिए ना सिर्फ अपनी व्यथा जाहिर की थी, बल्कि उन्होंने एक तरह से बागी रुख अख्तियार कर लिया था...अपने ट्वीट में रावत ने लिखा था, “है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने की बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। जिस समुद्र में तैरना है, सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं। जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है!”
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे मौके पर हरीश रावत की बगावत पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती थी। बेशक रावत मान गए हैं, लेकिन यह भी तय है कि उनके मानने के बावजूद पार्टी के ही कई जानकार मानते हैं कि कांग्रेस को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। बहरहाल जैसे ही रावत बागी हुए, प्रियंका सक्रिय हुईं। रावत को दिल्ली बुलाया और उनकी बातें सुनीं। इसके बाद रावत ने ट्वीट करके खुद कहा कि ‘हरदा’ मान जाएगा। हरीश रावत को प्यार से उत्तराखंड में हरदा कहा जाता है। साफ है कि प्रियंका के हस्तक्षेप से उत्तराखंड कांग्रेस की यह बगावत थम गई है।
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