होम क्या 1985 से चली आ रही रवायत इस बार भी रहेगी कायम या योगी बदल देंगे इतिहास,

प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Jan 3, 2022 08:35 PM

क्या 1985 से चली आ रही रवायत इस बार भी रहेगी कायम या योगी बदल देंगे इतिहास,

क्या 1985 से चली आ रही रवायत इस बार भी रहेगी कायम या योगी बदल देंगे इतिहास,

क्या 1985 से चली आ रही रवायत इस बार भी रहेगी कायम या योगी बदल देंगे इतिहास,

साल 2022 भारत की स्वतंत्रता का 75वां साल है। लोकतंत्र के लिहाज से इस अहम साल को देश के कई चुनावों का गवाह बनना है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में अब गिनती के दिन बचे हैं। इन राज्यों के नतीजें जो 2022 में आएंगे वो 2024 के आम चुनावों समेत आने वाले कम से कम एक दशक की राजनीति में दिशा निर्धारित करने वाले होंगे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में बीजेपी की सरकार है और पंजाब में कांग्रेस की। लेकिन राजनीति में यह कहावत आम है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता लखनऊ से होकर गुजरता है। यूपी में बीजेपी के सुपरस्टार प्रधानमंत्री मोदी और पोस्टर ब्वॉय योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा जुड़ी है। ऐसे में आज हम आपको उत्तर प्रदेश के प्रमुख नेताओं से अवगत कराएंगे। इसके साथ ही प्रदेश के चुनावी मुद्दे भी बताएंगे। इसके साथ ही जानेंगे हालिया सर्वेक्षण में किस पार्टी का है बोल बाला और किसे जनता ने अपनी उम्मीदों की कसौटी पर कम आंका है।1. योगी आदित्यनाथ : योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचुर गांव में हुआ। योगी आदित्‍यनाथ (तब अजय सिंह बिष्ट के नाम से जाने जाते थे) बचपन से ही बहुत कुशाग्र और कर्मठ स्‍वभाव के थे। साल 1994 में दीक्षा के बाद वह योगी आदित्यनाथ बन गए थे। योगी हिंदू युवा वाहिनी संगठन के संस्थापक भी हैं। 1998 से लेकर मार्च 2017 तक योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से सांसद रहे और हर बार उनकी जीत का आंकड़ा बढ़ता ही गया। फिर आता है साल 2017 का वो दौर जब यूपी में नरेंद्र मोदी के नाम पर सवार बीजेपी की पतवार ने पूरे दम-खम से जीत सुनिश्चित की। तमाम तैरते नामों के बीच योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को यूपी की बागडोर संभाली। 

2. अखिलेश यादव: यूपी की राजनीति में कभी एक कहावत 'जलवा जिसका कायम है उसका नाम मुलायम है' बेहद ही मशहूर हुआ करती थी। देश के पूर्व रक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सियासी अखाड़े के साथ ही राजनीति के दांव-पेंच में ङी विरोधियों को चित करने वाले मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव का राजनीतिक परिवेश में बड़ा होने केकारण राजनीति में आना तय था। अखिलेश की स्कूली शिक्षा राजस्थान के धौलपुर स्थित मिलिट्री स्कूल से हुई है। वहां से निकलर उन्होंने बंगलुरु के एक कॉलेज से सिविल एनवायरनमेंट इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। वो पहली बार कन्नौज से सांसद चुने गए। यह सीट उनके पिता मुलायम सिंह यादव के इस्तीफे से खाली हुई थी। अखिलेश 2004 और 2009 का लोकसभा चुनाव भी कन्नौज से ही जीते। मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश यादव ने कन्नौज के सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था। वहां कराए गए उपचुनाव में डिंपली जीतीं और पहली बार लोकसभा पहुंचीं। वो वहां से 2014 में भी सांसद चुनी गईं। लेकिन 2017 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

3. मायावती: मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली के सुचेता कृपलानी अस्पताल में हुआ। मायावती के पिता डाक विभाग में तृतीय श्रेणी के कर्मचारी थे। मायावती के छह भाई और दो बहनें हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सरकारी विद्यालय से की और इसके बाद 1975 में कालिंदी काॅलेज से बीए की डिग्री ली। साल 1982 में कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की और मायावती ने बतौर सदस्य शामिल हुई। बिजनौर की उसी सीट पर साल 1989 में मायावती जीत दर्ज कर पहली बार संसद पहुंची। अप्रैल 1994 में वह पहली बार राज्यसभा के लिए चुनी गईं। जून 1995 में उत्तर प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। 18 अक्टूबर 1995 तक वो इस पद पर रहीं। उनका दूसरा कार्यकाल 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक रहा। इस दौरान बीजेपी के समर्थन से उन्होंने सरकार बनाई और दूसरी बार सीएम पद की शपथ ली। सीएम के रूप में उनका तीसरा कार्यकाल पिछले दोनों कार्यकाल की अपेक्षा लंबा रहा और वे 3 मई 2002 से 29 मई 2003 तक सीएम रहीं। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा को पूर्ण बहुमत मिला और वे 13 मई 2007 से 7 मार्च 2012 तक पूरे पांच साल उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। 

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