होम पेपर लीक अमेंडमेंट बिल, छात्र आंदोलन, सरकार की भूमिका और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अभिजीत दीपके ने इंटरव्यू में रखी अपनी बात

समाचारदेशयूथशिक्षा Alert Star Digital Team Jul 31, 2026 03:07 PM

पेपर लीक अमेंडमेंट बिल, छात्र आंदोलन, सरकार की भूमिका और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अभिजीत दीपके ने इंटरव्यू में रखी अपनी बात

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में नीट पेपर लीक अमेंडमेंट बिल, छात्र आंदोलन और सरकार की कार्यप्रणाली पर विस्तार से अपनी राय रखी।

पेपर लीक अमेंडमेंट बिल, छात्र आंदोलन, सरकार की भूमिका और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अभिजीत दीपके ने इंटरव्यू में रखी अपनी बात

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में नीट पेपर लीक अमेंडमेंट बिल, छात्र आंदोलन और सरकार की कार्यप्रणाली पर विस्तार से अपनी राय रखी। यह बातचीत ऐसे समय हुई, जब संसद के दोनों सदनों से पेपर लीक अमेंडमेंट बिल पारित हो चुका है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मुद्दे पर वीडियो संदेश जारी कर चुके हैं।

'बिल पेपर लीक रोकने के बजाय बाद की कार्रवाई पर केंद्रित'

अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी समझ के अनुसार नया कानून पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने की व्यवस्था मजबूत करने के बजाय, घटना होने के बाद की कार्रवाई और सजा पर अधिक केंद्रित है। उन्होंने कहा कि इस कानून में जेल की सजा चार साल से बढ़ाकर दस साल और जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार पेपर लीक की संभावना पहले से मानकर चल रही है।

उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन का उद्देश्य ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोकने की व्यवस्था सुनिश्चित करना था, जबकि मौजूदा कानून घटना के बाद की कानूनी प्रक्रिया पर अधिक जोर देता है। दीपके ने यह भी कहा कि जब तक सरकार की नीयत मजबूत नहीं होगी और रोकथाम की व्यवस्था प्रभावी नहीं बनेगी, तब तक केवल सख्त कानून से बड़ा बदलाव संभव नहीं है।

मुआवजा, जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

इंटरव्यू के दौरान दीपके ने कहा कि आंदोलन के दौरान पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग उठाई गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार अन्य मामलों में त्वरित आर्थिक फैसले ले सकती है, लेकिन पीड़ित परिवारों को राहत देने में देरी हो रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और विभाग के दोनों सचिवों के बदले जाने से यह स्पष्ट होता है कि सरकार को दबाव में कुछ फैसले लेने पड़े। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, जवाबदेही तय करने और श्वेत पत्र लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर भी जताई आपत्ति

अभिजीत दीपके ने नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी देना उचित संदेश नहीं देता, जिनके बारे में पहले विवाद सामने आ चुके हैं। उन्होंने विभाग में नए अधिकारियों की नियुक्तियों पर भी सवाल खड़े किए और पारदर्शिता की मांग की।

प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और मामलों की वापसी की मांग

दीपके ने कहा कि छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान जिस तरह कार्रवाई हुई, उससे लोगों में नाराजगी बढ़ी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं और भविष्य में उन्हें किसी प्रकार की पुलिस कार्रवाई का सामना न करना पड़े। उनका कहना था कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलनकारी दोबारा सड़क पर उतरने को मजबूर हो सकते हैं।

सरकार से बातचीत और आंदोलन को लेकर क्या कहा?

सरकार की ओर से संपर्क किए जाने के सवाल पर दीपके ने बताया कि 20 जुलाई से पहले ही प्रशासन की तरफ से बातचीत की पहल की गई थी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में पुलिस के माध्यम से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने स्थानीय अधिकारियों के बजाय शीर्ष स्तर पर बातचीत की मांग रखी क्योंकि उनके अनुसार बड़े फैसले स्थानीय प्रशासन के स्तर पर संभव नहीं थे।

सोनम वांगचुक से मुलाकात नहीं होने का किया जिक्र

सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के सवाल पर अभिजीत दीपके ने कहा कि उन्होंने कई बार उनसे मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली। उन्होंने बताया कि सोनम वांगचुक का पत्र पढ़कर उन्हें भी आश्चर्य हुआ, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का उल्लेख करते हुए अनशन समाप्त करने की बात कही थी। दीपके ने उन्हें गांधीवादी बताते हुए कहा कि वह फिलहाल आराम कर रहे हैं और लद्दाख लौट चुके हैं।

आंदोलन को बताया पूरी तरह गैर-राजनीतिक

आम आदमी पार्टी से जुड़े सवाल पर अभिजीत दीपके ने कहा कि आंदोलन को किसी राजनीतिक दल ने खड़ा नहीं किया था। उनके अनुसार विभिन्न दलों के समर्थक व्यक्तिगत रूप से शामिल हो सकते हैं, लेकिन आंदोलन पूरी तरह छात्रों और आम नागरिकों का था। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन में शामिल अधिकांश लोग पहली बार किसी आंदोलन का हिस्सा बने थे और वे बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल सहित कई राज्यों से पहुंचे थे।

दीपके ने कहा कि भाजपा को छोड़कर अधिकांश विपक्षी दलों ने आंदोलन का समर्थन किया, लेकिन आंदोलन का संचालन पूरी तरह स्वतंत्र तरीके से हुआ। उन्होंने बताया कि भोजन और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च आम नागरिकों, डॉक्टरों और प्रोफेसरों के सहयोग से पूरा किया गया।

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Read More Articles

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)