होम महान शख्सियत थे डॉ. अविनाश कुमार सक्सेना, जिनके निधन के बाद सैकड़ों लोगों की आंखें नम हो गईं
एक ऐसा नाम, जो स्वास्थ्य, सेवा, शिक्षा और संवेदनशीलता का पर्याय बन गया। हजारों मरीजों के थे उम्मीद की किरण, पत्रकारिता में भी छोड़ी अमिट छाप
शाहजहांपुर। कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका जीवन केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वे पूरे समाज की धरोहर बन जाते हैं। उनके जाने के बाद केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरा शहर शोक में डूब जाता है। ऐसी ही महान शख्सियत थे डॉ. अविनाश कुमार सक्सेना, जिनके निधन के बाद सैकड़ों लोगों की आंखें नम हो गईं। स्वास्थ्य, शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
करीब 30 वर्ष पूर्व वे लखनऊ से प्रकाशित एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के संवाददाता रहे। उन्होंने कई वर्षों तक सक्रिय पत्रकारिता की तथा स्वतंत्र लेखन के माध्यम से सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक विषयों को प्रमुखता से उठाया। वे एलर्ट स्टार समाचार पत्र के संयुक्त संपादक के रूप में भी जुड़े रहे और पत्रकारिता को निष्पक्षता, संवेदनशीलता एवं जनहित के दृष्टिकोण से नई दिशा देने का प्रयास किया।
डॉ. अविनाश कुमार सक्सेना का जन्म 29 जुलाई 1950 को हुआ था। बचपन से ही वे सरल, संवेदनशील और सेवा-भाव से ओतप्रोत थे। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा लखनऊ मेडिकल कॉलेज से बी.एम.एस. (BMS) तथा सी.सी.एच. (CCH) की शिक्षा नई दिल्ली से प्राप्त की। चिकित्सा क्षेत्र में कदम रखने के बाद उन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का माध्यम बनाया।
वे ऐसे चिकित्सक थे, जिनकी पहचान केवल एक डॉक्टर के रूप में नहीं, बल्कि गरीबों और जरूरतमंदों के मसीहा के रूप में थी। उन्होंने हजारों मरीजों का निःशुल्क उपचार किया। अनेक लोग केवल फोन पर अपनी बीमारी बताते थे और वे बिना किसी स्वार्थ के दवा बता देते थे। उनकी बताई दवाओं से मरीज स्वस्थ हो जाते थे। किसी भी सामाजिक, पारिवारिक अथवा सार्वजनिक कार्यक्रम में लोग अपने स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बताते और वे वहीं दवा लिख देते थे। उन्होंने कभी भी किसी जरूरतमंद को मना नहीं किया। लोगों का विश्वास था कि उनके हाथों में अद्भुत शिफा थी।
स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ वे शिक्षा के क्षेत्र में भी एक प्रेरणास्रोत रहे। वे श्री चित्रगुप्त महिला विद्यालय जूनियर हाई स्कूल, रोशनगंज, शाहजहांपुर के प्रबंधक थे। उन्होंने विद्यालय के विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए निरंतर कार्य किया। आवश्यकता के अनुसार योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति कर विद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
बतौर प्रबंधक उन्होंने विद्यालय की व्यवस्था को अनुशासन, पारदर्शिता और कुशल नेतृत्व के साथ संचालित किया। शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राओं की समस्याओं के समाधान के लिए वे सदैव तत्पर रहते थे। उनके नेतृत्व में विद्यालय निरंतर प्रगति करता रहा।
यह सेवा और शिक्षा की परंपरा उन्हें अपने पिता स्वर्गीय कृष्ण मुरारी सक्सेना से विरासत में मिली थी, जो इसी विद्यालय के प्रबंधक रहे और जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। डॉ. अविनाश कुमार सक्सेना ने उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विद्यालय को नई पहचान दिलाई।
लंबी बीमारी के बाद 16 जुलाई 2026 को बरेली स्थित रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज में अपराह्न लगभग 3:00 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन का समाचार मिलते ही पूरे जनपद में शोक की लहर दौड़ गई।

उनकी अंतिम यात्रा में राजनीतिक, पत्रकारिता, शिक्षा, चिकित्सा एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों सहित सर्व समाज के सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। यह दृश्य उनके प्रति लोगों के असीम सम्मान और प्रेम का सजीव प्रमाण था।
डॉ. अविनाश कुमार सक्सेना का संपूर्ण जीवन मानव सेवा, शिक्षा, पत्रकारिता, सादगी, विनम्रता और सामाजिक समर्पण का अनुपम उदाहरण रहा। उनके द्वारा किए गए कार्य आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।
विनम्र श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।
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