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समाचारदेशराजनीति Alert Star Digital Team Nov 29, 2025 05:54 PM

जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा, मौलाना महमूद मदनी का भड़काऊ बयान, RSS पर भी साधा निशाना

जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने भोपाल में आयोजित नेशनल गवर्निंग बॉडी मीटिंग में जिहाद शब्द को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने जिहाद जैसे इस्लाम के पवित्र विचारों को गलत इस्तेमाल,

जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा, मौलाना महमूद मदनी का भड़काऊ बयान, RSS पर भी साधा निशाना

जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने भोपाल में आयोजित नेशनल गवर्निंग बॉडी मीटिंग में जिहाद शब्द को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने जिहाद जैसे इस्लाम के पवित्र विचारों को गलत इस्तेमाल, गड़बड़ी और हिंसा से जुड़े शब्दों में बदल दिया है।

'जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा'

मौलाना महमूद मदनी ने आरोप लगाया कि लव जिहाद, लैंड जिहाद, एजुकेशन जिहाद और थूक जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके मुसलमानों को बहुत दुख पहुंचाया जाता है और उनके धर्म का अपमान किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार और मीडिया में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।

इस दौरान विवादित टिप्पणी करते हुए मौलाना महमूद मदनी ने कहा:

"जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा।"

देश के मौजूदा हालात और मुसलमानों की स्थिति

महमूद मदनी ने देश के मौजूदा हालात को "बहुत संवेदनशील और चिंताजनक" बताया। उन्होंने कहा कि:

  • कमजोर किया जा रहा: "दुख की बात है कि एक समुदाय को कानूनी तौर पर कमजोर, सामाजिक रूप से अलग-थलग और आर्थिक रूप से बेदखल किया जा रहा है।"
  • हमले: उन्होंने कहा कि उनके धर्म, पहचान और वजूद को कमजोर करने के लिए मॉब लिंचिंग, बुलडोजर एक्शन, वक्फ प्रॉपर्टी पर कब्जा और धार्मिक मदरसों के खिलाफ निगेटिव कैंपेन जैसी कोशिशें हो रही हैं।
  • असुरक्षा: उन्होंने कहा, "आज मुसलमान रास्ते पर अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्हें कदम-कदम पर नफरतों का सामना करना पड़ता है। अब हमें तैयार भी होना पड़ेगा।"

उन्होंने 'घर वापसी' के नाम पर किसी खास धर्म में शामिल करने वालों को खुली छूट मिलने को 'दोहरा रवैया' बताया।

सुप्रीम कोर्ट पर मौलाना मदनी के बिगड़े बोल

महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भी गंभीर सवाल उठाए।

"दुख की बात है कि पिछले कुछ सालों में खासकर बाबरी मस्जिद और ट्रिपल तलाक जैसे मामलों में फैसलों के बाद यह आम सोच बन गई है कि कोर्ट सरकारी दबाव में काम कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट उस समय तक ही सुप्रीम कहलाने का हकदार है, जब तक आईन की पाबंदी करे और कानून के कर्तव्य का ख्याल रखे। अगर ऐसा न करे तो वह नैतिक तौर पर सुप्रीम कहलाने का हकदार नहीं है।"

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