होम Kanpur-Lucknow Expressway: उद्घाटन से पहले बह गई एक्सप्रेसवे की मिट्टी, मंत्री के बयान पर मचा सियासी बवाल
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं. औपचारिक उद्घाटन से पहले हुई बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में साइड सपोर्ट की मिट्टी बह गई.
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं. औपचारिक उद्घाटन से पहले हुई बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में साइड सपोर्ट की मिट्टी बह गई. इसके अलावा कई स्थानों पर सुरक्षा फेंसिंग भी क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
बारिश का असर केवल एक्सप्रेसवे तक ही सीमित नहीं रहा. राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर करीब दो वर्ष पहले बनी सड़क भी कई जगह उखड़ती नजर आई. वहीं, कुछ ओवरब्रिजों पर लोहे के गार्डर दिखाई देने लगे, जिसके बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे.
जब पत्रकारों ने इस मामले में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह से निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा, "कौन सी नई बात आप कह रहे हो? आप अपने आप सड़क बना लो. अगर सड़क बनती है, कभी टूटती भी है, कभी खराब भी होती है, कभी मरम्मत भी होती है. यह सतत चलने वाली प्रक्रिया है. ऐसा नहीं है कि कई जगह भ्रष्टाचार हुआ है. बारिश में कितनी भी अच्छी सड़क बने, थोड़ा बहुत नुकसान होता है. बारिश के बाद जहां भी सड़क टूटी होगी, उसे ठीक करा लिया जाएगा."
मंत्री का यह बयान सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया.
मंत्री के बयान के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर प्रदेश सरकार की आलोचना की. कांग्रेस ने लिखा कि जनता के टैक्स के पैसों से वेतन और सुविधाएं लेने वाले मंत्री यह कह रहे हैं कि "आप अपने आप सड़क बना लो." पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि सड़क निर्माण की जिम्मेदारी भी जनता की ही है, तो फिर सरकार जनता से भारी-भरकम टैक्स क्यों वसूलती है. कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावों पर भी सवाल खड़े किए.
मामले के सामने आने के बाद संबंधित विभाग हरकत में आया. जिन स्थानों पर एक्सप्रेसवे के किनारों की मिट्टी बह गई थी, वहां दोबारा मिट्टी भराई का काम कराया गया. साथ ही क्षतिग्रस्त सुरक्षा फेंसिंग की भी मरम्मत की गई. विभागीय टीमें मशीनों और मजदूरों के साथ मौके पर पहुंचीं और तेजी से सुधार कार्य शुरू कराया, ताकि निर्माण से जुड़ी कमियों को दूर किया जा सके.
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