होम अमेरिका की घेराबंदी से ईरान की कमर टूटी? अरबों डॉलर का नुकसान, तेल निर्यात पर लगा ब्रेक
ईरान इस समय भारी आर्थिक और सैन्य दबाव का सामना कर रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के आसपास अमेरिका की ओर से की गई नौसैनिक घेराबंदी ने उसके तेल निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है।
ईरान इस समय भारी आर्थिक और सैन्य दबाव का सामना कर रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के आसपास अमेरिका की ओर से की गई नौसैनिक घेराबंदी ने उसके तेल निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस कदम से ईरान की आय का प्रमुख स्रोत बाधित हुआ है, जिससे आर्थिक हालात और अधिक बिगड़ते जा रहे हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस घेराबंदी के चलते ईरान को करीब 4.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। पहले से प्रतिबंधों का सामना कर रही अर्थव्यवस्था पर यह झटका और भारी पड़ा है। साथ ही यह भी सामने आया है कि प्रतिबंधों से बचने के लिए गुप्त शिपमेंट और क्षेत्रीय समुद्री रणनीतियों पर ईरान की निर्भरता अब प्रभावी नहीं रह गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 13 अप्रैल को कूटनीतिक प्रयास असफल होने के बाद अमेरिका ने यह घेराबंदी लागू की। इसके कारण दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक के जरिए ईरान का तेल परिवहन काफी हद तक ठप हो गया है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना और उसकी क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए फंडिंग क्षमता को कमजोर करना है। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने प्रेस सचिव जोएल वाल्डेज के हवाले से कहा कि यह घेराबंदी “पूरी ताकत से लागू” है और ईरान के वित्तीय नेटवर्क पर “निर्णायक असर” डाल रही है।
इस संकट का असर ईरान की आंतरिक राजनीति में भी देखने को मिल रहा है। विश्लेषकों के अनुसार सत्ता के अंदर कुछ गुट अमेरिका के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के पक्ष में हैं, जबकि अन्य गुट तनाव कम करने के लिए बातचीत की राह अपनाने की वकालत कर रहे हैं।
देश के भीतर हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। विदेशी मुद्रा की कमी के चलते आवश्यक वस्तुओं की राशनिंग तक करनी पड़ रही है, जिससे आम नागरिकों पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका का जलडमरूमध्य पर “पूरा नियंत्रण” है और यह घेराबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक समुद्री मार्गों पर “सामान्य आवागमन” बहाल नहीं हो जाता। इस बयान पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
इसी दौरान ईरान को एक और बड़ा झटका लगा है। उत्तर-पश्चिमी प्रांत जंजान में पुराने विस्फोटकों को निष्क्रिय करते समय इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के 14 सदस्यों की मौत हो गई। यह घटना दर्शाती है कि खतरा केवल युद्ध क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य इलाकों में भी जोखिम बना हुआ है।
पूरे क्षेत्र में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ सीधी लड़ाई फिलहाल समाप्त हो चुकी है, लेकिन अमेरिका प्रतिबंधों को और कड़ा कर रहा है और अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। वहीं ईरान ने बातचीत के लिए तैयार होने के संकेत दिए हैं, हालांकि उसने स्पष्ट किया है कि वह किसी दबाव में शर्तें स्वीकार नहीं करेगा।
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