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समाचारराजनीतिप्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Jun 12, 2026 07:31 PM

UP Politics: BSP को AIMIM का नया गठबंधन ऑफर, क्या 2027 चुनाव से पहले बदलेंगी मायावती अपनी रणनीति?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां अभी से राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर रही हैं। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती भले ही कई बार साफ कर चुकी हों कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव किसी भी दल के साथ गठबंधन करके नहीं लड़ेगी, लेकिन..

UP Politics: BSP को AIMIM का नया गठबंधन ऑफर, क्या 2027 चुनाव से पहले बदलेंगी मायावती अपनी रणनीति?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां अभी से राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर रही हैं। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती भले ही कई बार साफ कर चुकी हों कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव किसी भी दल के साथ गठबंधन करके नहीं लड़ेगी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें एक बार फिर राजनीतिक साझेदारी का प्रस्ताव मिला है। इस बार यह ऑफर एआईएमआईएम (AIMIM) की ओर से आया है, जिसने बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।

बहराइच रैली से पहले AIMIM ने दिया गठबंधन का संकेत

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की 14 जून को प्रस्तावित बहराइच रैली से पहले पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने बड़ा राजनीतिक बयान दिया। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन करना चाहती है।

शौकत अली का मानना है कि दलित और मुस्लिम वोटों का समीकरण उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने दावा किया कि यदि दोनों दल साथ आते हैं तो यह गठजोड़ प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।

दलित-मुस्लिम समीकरण को बताया मजबूत विकल्प

एआईएमआईएम नेता ने कहा कि प्रदेश में नए राजनीतिक विकल्प की जरूरत है और दलित-मुस्लिम गठबंधन इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है। उनका कहना है कि यह गठबंधन केवल चुनावी समझौता नहीं बल्कि एक मजबूत सामाजिक और राजनीतिक साझेदारी साबित हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में हुए कुछ विपक्षी गठबंधन अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए थे और आगामी चुनाव में अलग रणनीति की जरूरत होगी।

कांग्रेस भी कर चुकी है बसपा से संपर्क की कोशिश

एआईएमआईएम से पहले कांग्रेस भी बसपा के साथ राजनीतिक संवाद स्थापित करने की कोशिश कर चुकी है। पिछले महीने बाराबंकी से सांसद तनुज पुनिया कुछ नेताओं के साथ मायावती के आवास पहुंचे थे। हालांकि उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला और उन्हें वापस लौटना पड़ा।

बाद में कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया था कि उनका दौरा किसी राजनीतिक गठबंधन के उद्देश्य से नहीं था, बल्कि वे बसपा सुप्रीमो का हालचाल जानने गए थे। इसके बावजूद इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थीं।

मायावती पहले ही साफ कर चुकी हैं अपना रुख

बसपा प्रमुख मायावती कई मौकों पर यह दोहरा चुकी हैं कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव अपने दम पर लड़ेगी और किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी। ऐसे में AIMIM के नए प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा जरूर शुरू हो गई है, लेकिन फिलहाल बसपा की ओर से किसी सकारात्मक संकेत की जानकारी सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती की रणनीति फिलहाल स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरने की दिखाई देती है और वह किसी भी गठबंधन को लेकर जल्दबाजी में फैसला नहीं लेंगी।

2027 चुनाव से पहले बढ़ सकती हैं राजनीतिक हलचलें

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर लगातार नए समीकरण बनते और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। AIMIM के इस प्रस्ताव के बाद अब सभी की निगाहें बसपा नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि मायावती अपने पुराने रुख पर कायम रहती हैं या बदलते राजनीतिक हालात में कोई नया फैसला लेती हैं।

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