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समाचारदेशविचारकानून Alert Star Digital Team Feb 19, 2026 09:04 PM

सरकार की आलोचना करने पर लग जाएगा UAPA? दिल्ली हाई कोर्ट में इस सख्त कानून पर छिड़ी बड़ी बहस

दिल्ली हाई कोर्ट में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA) की संवैधानिकता और उसकी कई सख्त धाराओं को चुनौती देने वाली एक बेहद अहम याचिका पर सुनवाई हुई है।

सरकार की आलोचना करने पर लग जाएगा UAPA? दिल्ली हाई कोर्ट में इस सख्त कानून पर छिड़ी बड़ी बहस

दिल्ली हाई कोर्ट में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA) की संवैधानिकता और उसकी कई सख्त धाराओं को चुनौती देने वाली एक बेहद अहम याचिका पर सुनवाई हुई है। 'फाउंडेशन ऑफ मीडिया' की तरफ से दायर की गई इस याचिका में अभिव्यक्ति की आजादी और इस कानून के दुरुपयोग को लेकर बड़े सवाल उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील ने अदालत के सामने मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना पूरी तरह जायज है, बशर्ते वह किसी भी प्रकार की हिंसा को बढ़ावा न देती हो।

अदालत में यह दलील दी गई कि केवल सरकार की नीतियों की आलोचना करने मात्र को देश के खिलाफ असंतोष मान लेना और यूएपीए जैसा गंभीर कानून लगा देना पूरी तरह से गलत है। वकील ने कोर्ट को बताया कि इस कानून में 'डिसअफेक्शन' यानी 'असंतोष' शब्द को साफ तौर पर परिभाषित ही नहीं किया गया है। इस अस्पष्टता की वजह से खासतौर पर पत्रकारों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल बना रहता है। उन्होंने अदालत के संज्ञान में यह बात भी डाली कि कई पत्रकार सिर्फ सरकारी नीतियों की आलोचना करने के कारण लंबे समय से जेलों में बंद हैं। वकील के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति किसी नीति की आलोचना करता है और उससे हिंसा नहीं भड़कती, तो उसे गैरकानूनी नहीं माना जा सकता, क्योंकि यही तो लोकतंत्र की असली भावना है।

दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और जस्टिस तेजस करिया की बेंच इस संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत का ध्यान यूएपीए की धारा 2(1)(o)(iii) की ओर खींचते हुए कहा कि यह धारा बहुत अस्पष्ट है और इसका बड़ी आसानी से गलत इस्तेमाल हो सकता है। इसके अलावा, इस कानून में अग्रिम जमानत पर लगी रोक और जमानत के बेहद सख्त प्रावधान भी आम नागरिकों की आज़ादी को सीधे तौर पर सीमित करते हैं।

आपको बता दें कि इस मामले में यूएपीए की उन धाराओं को भी कड़ी चुनौती दी गई है, जो एजेंसियों को किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने और उसकी संपत्ति जब्त करने की व्यापक शक्ति देती हैं। यह पूरा मामला पहले सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया था, जहां से इसे सुनवाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट भेज दिया गया। अब इस अहम मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की गई है।

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