होम हॉर्मुज से लेबनान तक शर्तें ही शर्तें, इस्लामाबाद में ईरान का बड़ा दांव-अब अमेरिका के फैसले पर टिकी दुनिया

समाचारविदेश Alert Star Digital Team Apr 11, 2026 06:28 PM

हॉर्मुज से लेबनान तक शर्तें ही शर्तें, इस्लामाबाद में ईरान का बड़ा दांव-अब अमेरिका के फैसले पर टिकी दुनिया

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में जारी अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बीच ईरान ने अपनी रणनीतिक शर्तें सामने रख दी हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं, जिन्हें आगे की बातचीत के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

हॉर्मुज से लेबनान तक शर्तें ही शर्तें, इस्लामाबाद में ईरान का बड़ा दांव-अब अमेरिका के फैसले पर टिकी दुनिया

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में जारी अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बीच ईरान ने अपनी रणनीतिक शर्तें सामने रख दी हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं, जिन्हें आगे की बातचीत के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

ईरान की चार बड़ी शर्तें

ईरान ने साफ तौर पर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं—

  • फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को तुरंत जारी किया जाए
  • लेबनान में तत्काल युद्धविराम लागू किया जाए
  • हॉर्मुज की खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों की संख्या प्रतिदिन 15 तक सीमित की जाए और उस पर शुल्क लगाया जाए
  • खाड़ी देशों से अमेरिकी सैनिकों की वापसी सुनिश्चित की जाए

इन शर्तों को क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों से सीधे जुड़ा माना जा रहा है।

अमेरिका की ओर से नरमी के संकेत

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने दावा किया है कि अमेरिका ने कतर और अन्य विदेशी बैंकों में फंसी ईरानी संपत्तियों को जारी करने पर सहमति के संकेत दिए हैं। इसे वार्ता में सकारात्मक प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति JD Vance, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और Jared Kushner शामिल हैं, जो इस्लामाबाद पहुंचकर बातचीत में हिस्सा ले रहे हैं।

‘इजरायल फर्स्ट’ नीति पर ईरान की चेतावनी

ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति Mohammad Reza Aref ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि बातचीत “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत होती है तो समझौते की संभावना है, लेकिन “इजरायल फर्स्ट” नीति अपनाने पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में ईरान अपनी रक्षा क्षमता और बढ़ाएगा, जिसका वैश्विक असर पड़ सकता है।

15 दिन की डेडलाइन, अगले 48 घंटे अहम

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इस वार्ता के लिए 15 दिन की समयसीमा तय की है। आने वाले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, जो तय करेंगे कि यह वार्ता स्थायी शांति की दिशा में बढ़ेगी या फिर तनाव दोबारा बढ़ेगा।

कड़ी सुरक्षा के बीच जारी बातचीत

ईरानी प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश के दौरान AWACS, इलेक्ट्रॉनिक युद्धक विमान और लड़ाकू विमानों की सुरक्षा दी गई। इस्लामाबाद और रावलपिंडी में भी कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, जिससे इस वार्ता की संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

क्या होगा अगला कदम?

ईरान की सख्त शर्तों और अमेरिका के शुरुआती संकेतों के बीच अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह वार्ता स्थायी समाधान की ओर बढ़ेगी या फिर एक बार फिर तनाव बढ़ेगा।

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