होम बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर, चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने LJP पर जमाया कब्जा

समाचारखेल Alert Star Digital Team Jun 14, 2021 10:31 PM

बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर, चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने LJP पर जमाया कब्जा

बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर, चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने LJP पर जमाया कब्जा

बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर, चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने LJP पर जमाया कब्जा

70 एमएम के पर्दे पर चल रहे सिनेमा में जब ऐसे सीन आते हैं तो दर्शकों के रोमांच का ठिकाना नहीं रहता, मगर सोचिए जब हकीकत में ऐसी स्थिति किसी राजनेता की ज़िंदगी में आ जाए तो उसकी क्या हालत होगी. रील लाइफ के इस सीन का साइड इफेक्ट समझने के लिए अब रियल लाइफ़ का ये सीन देखिए. चाचा पशुपति पारस के घर के बाहर कार में बैठे भतीजे चिराग पासवान हॉर्न बजा रहे थे और दरबान गेट भी नहीं खोल रहा था. जाहिर है घर के अंदर से इजाजत नहीं होगी. मगर मीडिया के कैमरों से घिरे चिराग के लिए सिचुएशन बड़ी अजीबोगरीब हो रही थी. गनीमत ये रही कि करीब आधे घंटे के इंतजार के बाद गेट खुला और चिराग घर के अंदर दाखिल हुए, लेकिन एक घंटे के बाद जब चिराग घर के बाहर निकले तो उनके हाथ उम्मीद की रोशनी नहीं बल्कि नाउम्मीदी का अंधेरा था.

किसी फिल्म की कहानी की तरह एलजेपी में हुए फैमिली ड्रामे ने बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर कर दिया है. चिराग के चाचा पशुपति पारस ने एक झटके में पूरी पार्टी पर आधिपत्य जमा लिया और चिराग छटपटाते रह गए. लोक जनशक्ति पार्टी के 6 में से 5 सांसदों ने मिलकर राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को सभी पदों से हटा दिया और चिराग के चाचा पशुपति पारस को अपना नेता चुन लिया. पशुपति पारस को राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ-साथ संसदीय दल के नेता का जिम्मा भी सौंप दिया गया.

चिराग को एलजेपी से बेदखल करने वाले पांच सांसदों में चाचा पशुपति पारस, चौधरी महबूब अली कैसर, वीणा देवी, चंदन सिंह और चचेरे भाई प्रिंस राज शामिल हैं, जो कभी चिराग पासवान के बड़े भरोसेमंद कहे जाते थे. एलजेपी में फूट की सबसे बड़ी वजह चिराग की फैमिली ही रही, जो उनके लिए गए फैसलों से काफ़ी नाराज चल रहे थे. इसमें सबसे बड़ा फैसला था बिहार विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने का, जिसका खामियाजा भी पार्टी को भुगतना पड़ा, क्योंकि चुनाव में एलजेपी महज एक सीट पर जीत सकी और वो इकलौते विधायक राजकुमार सिंह भी जेडीयू में शामिल हो चुके हैं.

कहा जा रहा है कि पार्टी में परिवार के लोगों के बीच की कलह का फायदा बाहरी लोगों ने उठाया, जिसमें जेडीयू के तीन बड़े नेताओं का नाम सबसे आगे है. सूत्रों के मुताबिक इनमें जेडीयू सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और विधानसभा उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी शामिल हैं जबकि तीसरे नेता का नाम सामने नहीं आया है. इन तीनों के मकसद को अंजाम तक पहुंचाने में मदद की एलजेपी के विभीषण सूरजभान सिंह ने की, जो चिराग के पिता और एलजेपी के संस्थापक स्वर्गीय रामविलास पासवान के बेहद करीबी थे.

अब जरा इस पूरे सियासी समीकरण को बनाने और बिगाड़ने की वजह भी जान लीजिए. खबर है कि एलजेपी से अलग होकर या कहें नई एलजेपी बनाकर पशुपति पारस समेत पांचों सांसद जेडीयू को समर्थन कर सकते हैं ताकि केंद्रीय मंत्रीमंडल में इन दोनों पार्टी की भागीदारी बढ़ सके. फिलहाल लोकसभा में बिहार से जेडीयू के 16 सांसद हैं. अगर एलजेपी के 5 सांसदों का समर्थन मिलता है तो नीतीश के पास कुल 21 सांसदों की ताकत हो जाएगी, जिससे केंद्र सरकार में मंत्री पद हासिल करने में मदद मिलेगी.

जानकारों के मुताबिक नीतीश ने पुराने करीबी पशुपति पारस को साधकर अपने सियासी दुश्मन नंबर एक चिराग पासवान का पत्ता साफ कर दिया और अब चिराग के सामने अंधेरा ही अंधेरा है. एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान और उनके चाचा सांसद पशुपति पारस के बीच टकराव के बाद बने हालात में अब किसके पास क्या पावर और अधिकार हो सकते हैं और चिराग पासवान के लिए अब क्या विकल्प बचता है, ये जानना जरूरी है. पहला विकल्प- चिराग पासवान लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर शिकायत कर सकते हैं. दूसरा विकल्प- चुनाव आयोग के पास जा सकते हैं कि एलजेपी के असली वारिस वही हैं. तीसरा विकल्प- पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बहुमत का हवाला देकर कोर्ट जा सकते हैं.

सवाल है कि और इस पूरे मामले में आगे क्या हो सकता है. अगर चुनाव आयोग तक बबात पहुंचती है तो पूरी प्रक्रिया क्या होगी. एलजेपी में अगर मतभेद बढ़ता है तो चुनाव चिन्ह और पार्टी के नेता पर इलेक्शन कमीशन निर्णय लेगा. चुनाव आयोग में किसी भी फैसले से पहले दोनों पक्षों की शिकायत और दावों के सबूत और हलफनामों की जांच होगी. विवाद का निपटारा होने तक चुनाव आयोग एलजेपी के मौजूदा चुनाव चिन्ह को जब्त कर सकता है. अगर दोनों गुट पार्टी के मूल नेता होने का दावा करते हैं तो आयोग दोनों से हलफनामे पर उनका पक्ष लेगा. चुनाव आयोग सांसद, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की लिस्ट भी मांगेगा. पूरी प्रक्रिया के बाद जो बहुमत साबित करेगा, वही मूल पार्टी और चुनाव चिन्ह का दावेदार होगा.

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)