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CMS संस्थापक डॉ.जगदीश गाँधी और संस्थापिका डॉ.भारती गाँधी ने विश्व जल दिवस पर की जल संरक्षण की अपील
लखनऊ, 22 मार्च 2021: विश्व जल दिवस पर सी.एम.एस. संस्थापक डॉ.जगदीश गाँधी और संस्थापिका डॉ. भारती गाँधी ने जल संरक्षण की अपील करते हुए कहा की जल ही जीवन है, जल के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है. हम सब जानते हैं हमारे लिए जल कितना महत्वपूर्ण है लेकिन यह सब बातें हम भूल जाते हैं और जाने अनजाने न जाने कितना पानी बर्बाद कर देते हैं.और इसी का नतीजा है कि आज भारत और विश्व के सामने पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है.पानी की इसी जंग को खत्म करने और इसके प्रभाव को कम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 1992 के अपने अधिवेशन में 22 मार्च को विश्व जल दिवस के रुप में मनाने का निश्चय किया जिस पर सर्वप्रथम 1993 को पहली बार 22 मार्च के दिन पूरे विश्व में जल दिवस के मौके पर जल के संरक्षण और रखरखाव पर जागरुकता फैलाने का कार्य किया गया।
इसी क्रम मे सी.एम.एस. संस्थापक डॉ.जगदीश गाँधी और संस्थापिका डॉ. भारती गाँधी ने जल के संरक्षण मे लिए मत्वपूर्ण कार्य करते हुए संस्था के 56 हजार बच्चो के माध्यम से जल के संरक्षण और रखरखाव पर अलख जगाने का काम वर्षो से करते रहे है, डॉ. जगदीश गाँधी इसके लिए अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय मे भी जागरूकता फैलाने का काम करते आ रहे है । सी.एम.एस. संस्थापक डॉ. जगदीश गाँधी और संस्थापिका डॉ. भारती गाँधी का कहना है की पानी की समस्या से हम जीत नहीं सकते तथा उनका ऐसा कहना है की जितना हो सके पानी को बर्बाद करने से रोका जाए तो इस समस्या का समाधान बेहद आसान हो जाएगा। लेकिन इसके लिए जरुरत है जागरुकता की, एक ऐसी जागरुकता की जिसमें छोटे से छोटे बच्चे से लेकर बड़े-बूढ़े सभी पानी को बचाना अपना धर्म समझे। डॉ.गाँधी कहते है की पृथ्वी का 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से भरा हुआ है लेकिन स्वच्छ जल की बात करें तो उसका प्रतिशत बहुत ही कम है। कई सारे देश ऐसे हैं जहां के रहवासी गंदा पानी पीकर अपना जीवन काट रहे हैं।आज पूरे विश्व की आबादी में 400 करोड़ ऐसे लोग हैं जिन्हें आज भी पीने भर पर्याप्त पानी नहीं मिलता है।आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि इस आबादी के एक चौथाई लोग भारत के हैं। विश्व में जल संकट आज भी है। इसलिए पानी का संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है।
वही डॉ. भारती गाँधी का कहना है की कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया को हाथ धोने की सलाह दी जा रही है। भले ही इस संकट की स्थिति में हाथ धोने के लिए ज्यादा पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, लेकिन हम अन्य कामों में बचत कर इसकी भरपाई कर सकते हैं। उन्होने कहा की आज के इस शुभ दिन पर हम सभी को प्रण लेना चाहिए की किसी भी तरह से पानी को प्रदूषित होने से बचाएँगे और अपने पर्यावरण का ख्याल रखेंगे।
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