होम संसद में हंगामा रोकने को विपक्ष तैयार, लोकसभा अध्यक्ष की ओर से बुलाई गई बैठक में भरी हामी
संसद में हंगामा रोकने को विपक्ष तैयार, लोकसभा अध्यक्ष की ओर से बुलाई गई बैठक में भरी हामी
नई दिल्ली। पांच राज्यों के बढ़ते चुनावी तापमान ने राजनीतिक दलों को संसद के कामकाज को गति देने पर सोचने को बाध्य कर दिया है। बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले हफ्ते में पेट्रोल-डीजल से लेकर कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ हंगामा कर संसद को ठप करने के बाद सोमवार से विपक्ष हंगामा रोकने को लगभग तैयार हो गया है। विपक्ष के इस बदले रुख के मद्देनजर अगले हफ्ते से संसद में विधायी कामकाज की गति के रफ्तार पकड़ने के पूरे आसार हैं।
राज्यों के चुनाव को देखते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए बड़ी संख्या में अपने सांसदों की संसद में मौजूदगी सुनिश्चित करना चुनौती बन गया है। कुछ विपक्षी दलों के प्रमुख नेता तो अगले हफ्ते से चुनाव तक सदन में नजर भी नहीं आएंगे। इस स्थिति में विपक्ष के लिए हंगामे को लंबा खींचना भी व्यावहारिक नजर नहीं आ रहा।
पेट्रोल-डीजल की महंगाई पर सरकार की घेरेबंदी की अगुआई कर रही कांग्रेस को इसका नजारा बुधवार को ही दिख गया, जब उसे अपने विरोध को प्रभावी बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ गया, क्योंकि सदन में उसके बमुश्किल दर्जन भर सांसद थे। कांग्रेस के लोकसभा में नेता अधीर रंजन चौधरी और मुख्य सचेतक के सुरेश तो सोमवार से सदन में आएंगे भी नहीं, क्योंकि वे अपने राज्यों के चुनाव में दम लगा रहे हैं। द्रमुक और तृणमूल के सांसदों की उपस्थिति तो लगभग नगण्य ही रह गई है।
विपक्षी खेमा भी सत्र को लंबा खींचने के मूड में नहीं
इस हकीकत को देखते हुए ही विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से गतिरोध का हल निकालने के लिए शुक्रवार को बुलाई बैठक में सदन में कामकाज को तेजी से आगे बढ़ाने की हामी भरने में देरी नहीं की। समझा जाता है कि स्पीकर ने कहा कि हंगामा जितना आगे बढ़ेगा संसद का सत्र उतना ही लंबा खींचेगा, क्योंकि सरकार के लिए वित्त विधेयक के अलावा मंत्रालयों की पूरक अनुदान मांगों को पारित कराना जरूरी है। जाहिर तौर पर विपक्षी खेमा भी सत्र को लंबा खींचने के मूड में नहीं है।
संसद का गतिरोध सोमवार से खत्म होने के सवाल पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के मुद्दे पर पहले हफ्ते दोनों सदनों में हंगामा कर विपक्ष ने अपनी भूमिका के साथ न्याय कर दिया है। अब सदन को बाधित करना राजनीतिक रूप से मुफीद नहीं होगा। चुनाव के कारण ही जरूरी विधायी कार्यों को पूरा करने के बाद 25 मार्च तक बजट सत्र को तय समय से पहले स्थगित करने की योजना है। जहां तक पेट्रोल-डीजल से लेकर किसानों के मुद्दे पर घेरने की बात है तो दोनों सदनों में तमाम मंत्रालयों के अनुपूरक मांगों पर चर्चा के दौरान भी विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिलेगा। गतिरोध खत्म करने पर बनी इस सहमति के बाद अगले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आजादी के 75 साल मनाने के समारोहों को लेकर दोनों सदनों में बयान देने का रास्ता भी साफ हो गया है।
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