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प्रदूषण से पीछा छूटा, छह साल का रिकॉर्ड टूटा
नीला आसमान, चटक धूप, धूल का नामोनिशान नहीं। जहां तक नजर जाए, एकदम साफ दृश्य, पत्तों की सरसराहट और पक्षियों की चहचहाहट..लॉकडाउन के इस दौर में कुछ ऐसी ही हो गई है दिल्ली की पहचान। यह वही दिल्ली है जो कुछ दिन पहले तक विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित 10 शहरों में शुमार थी। आज यहां की हवा इतनी साफ है कि श्वांस और अस्थमा के रोगी भी सुकून महसूस कर रहे हैं। सिर्फ दिल्ली ही नहीं, एनसीआर के शहरों में भी इन दिनों कमोबेश ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। घटे प्रदूषण के बीच साफ हवा ने पिछले छह साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
मौजूदा समय में हवा से पीएम 2.5, पीएम 10, कार्बन मोनोक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड काफी कम हो गई है। एयर इंडेक्स भी अच्छा या सामान्य श्रेणी में बना हुआ है। सुखद यह भी है कि प्रदूषण मुक्त हवा की यह स्थिति भी गत 22 मार्च से बनी हुई है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन सफर इंडिया के मुताबिक सबसे अधिक कमी नाइट्रोजन डाइऑक्साइड में आई है। पेट्रोल, डीजल सहित अन्य ईंधनों के जलने पर उत्पन्न होने वाला यही प्रदूषक तत्व फेफड़ों को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाता है। लेकिन लॉकडाउन की वजह से न तो वाहन चल रहे हैं और न ही औद्योगिक इकाइयां। प्रदूषक कण पीएम 2.5 और पीएम 10 भी 55 से 60 फीसद तक कम हो गया है
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