होम Mahakal Temple में दर्शन की कतार में मची भगदड़, कई श्रद्धालु घायल; करंट की अफवाह से फैली अफरा-तफरी
उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के ऊपरी तल पर विराजमान श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए लगी श्रद्धालुओं की कतार में सोमवार को अचानक अफरा-तफरी मच गई।
उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के ऊपरी तल पर विराजमान श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए लगी श्रद्धालुओं की कतार में सोमवार को अचानक अफरा-तफरी मच गई। हरसिद्धि मंदिर चौराहे के पास बैरिकेडिंग के भीतर डीपी के नजदीक करंट फैलने की अफवाह के बाद दर्शन के लिए इंतजार कर रहे लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान कई श्रद्धालु घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए चरक अस्पताल पहुंचाया गया।
घटना में घायल श्रद्धालुओं में ढांचा भवन उज्जैन निवासी हिंदू बाई, किशनपुरा उज्जैन निवासी 19 वर्षीय सागर पुत्र मनीष, ढांचा भवन निवासी लक्ष्मीबाई, गंजबासौदा निवासी अनसूया और उनकी मां ममता, ग्राम सिलवासा निवासी हरिश्चंद्र, वापी गुजरात निवासी, ग्वालियर निवासी 18 वर्षीय सोनम, दरभंगा बिहार निवासी सुजीत कुमार, ग्वालियर निवासी खुशी तथा वलसाड गुजरात निवासी तुलसी और उनकी मां रेखा बाई शामिल हैं।
भगदड़ के दौरान बैरिकेड्स से टकराने के कारण हरिश्चंद्र के पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। सभी घायलों का चरक अस्पताल में उपचार जारी है। घटना के बाद कुछ समय के लिए मंदिर में दर्शन व्यवस्था प्रभावित हुई, हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया। फिलहाल दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है।
हरसिद्धि मंदिर परिसर के बाहर की ओर भगदड़ जैसी स्थिति बनी थी। हरसिद्धि चौराहे से श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर के लिए श्रद्धालुओं की अलग कतार लगाई जाती है, जबकि महाकाल मंदिर में सामान्य दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्था अलग है।
घटना में घायल सागर लकी की मां मीनू ने बताया कि उनका बेटा भगदड़ में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गया। उनका आरोप है कि घटना के बाद तत्काल किसी ने उसकी मदद नहीं की। उन्होंने कहा, "किसी ने उसकी मदद नहीं की. न मंदिर प्रशासन की तरफ से कोई मदद मिली. बस एक भइया उसे उठाकर अस्पताल लेकर आए हैं."
सागर के मुताबिक वह रात करीब 1 बजे श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए कतार में लगा था। करीब सात-आठ घंटे का सफर करने के बाद उज्जैन पहुंचने के बावजूद उसे लगभग दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा। आरती का समय होने के कारण श्रद्धालुओं को रोक दिया गया था। इसके बाद अचानक गेट खोले गए, जिसके बाद भीड़ में भगदड़ मच गई।
पीड़ित ने बताया कि इसी दौरान टेंट गिर गया और बैरिकेड्स भी नीचे आ गए। सागर के दोनों पैर बैरिकेड्स के नीचे दब गए। काफी कोशिश के बाद वह एक पैर निकालने में सफल रहा, लेकिन दूसरे पैर में गंभीर चोट आई। उसने अपनी स्थिति बताते हुए कहा, "मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरी हड्डियां चूर हो गई हों."
सागर ने मंदिर की दर्शन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि भगदड़ के समय मौके पर पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उसके मुताबिक रातभर श्रद्धालु परेशान होते रहे और घटना के समय भी तत्काल मदद नहीं मिल सकी।
उसने बताया, "पुलिस वालों से भी चिल्ला कर मदद मांगी, आधे घंटे तक रोड पर पड़ा रहा, अकेला चिल्लाता रहा लेकिन किसी ने नहीं सुनी." इसके बाद एक बाहरी व्यक्ति ने उसकी मदद की और उसे हरसिद्धि माता मंदिर के पास लगाए गए हेल्थ कैंप तक पहुंचाया। सागर के अनुसार, इसके करीब आधे घंटे बाद एंबुलेंस वहां पहुंची।
घायल सागर ने मंदिर की दर्शन व्यवस्था में आम और VIP श्रद्धालुओं के बीच अंतर होने का आरोप भी लगाया। उसका कहना है कि VIP दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं और 300 रुपये की रसीद लेकर VIP दर्शन कराया जा रहा था।
पीड़ित के अनुसार, महाकाल मंदिर में पिछले दिन भी काफी भीड़ थी। सामान्य श्रद्धालुओं को मानसरोवर के पास से प्रवेश दिया जा रहा था, जहां उन्हें करीब चार घंटे तक कतार में खड़े रहना पड़ा। घटना के बाद प्रशासन ने स्थिति को संभालते हुए दर्शन व्यवस्था को दोबारा सामान्य कर दिया है।
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