होम महिला आरक्षण पर संसद में टकराव, राहुल गांधी बोले- ये सशक्तिकरण नहीं, देरी का प्लान
Women Reservation Bill को लेकर संसद में हुई तीखी बहस के दौरान राहुल गांधी ने सरकार के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर गंभीर सवाल खड़े किए.
Women Reservation Bill को लेकर संसद में हुई तीखी बहस के दौरान राहुल गांधी ने सरकार के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने इसे महिलाओं के लिए वास्तविक आरक्षण कानून मानने से इनकार करते हुए कहा कि इससे महिलाओं के सशक्तिकरण में देरी होगी. साथ ही उन्होंने सरकार से UPA काल में लाए गए महिला आरक्षण बिल को उसके पुराने स्वरूप में वापस लाने की मांग की. ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि कांग्रेस का 2010 का बिल और मौजूदा कानून आखिर किन मायनों में अलग हैं.
दोनों बिलों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके लागू होने के समय को लेकर है. 2023 का नारी शक्ति वंदन अधिनियम अपने क्रियान्वयन को अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ता है, जिससे इसके 2029 के लोकसभा चुनाव के आसपास लागू होने की संभावना जताई जा रही है.
वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार द्वारा 2010 में प्रस्तावित महिला आरक्षण बिल में ऐसी कोई शर्त नहीं थी, जिससे इसे पारित होते ही लागू किया जा सकता था.
नए कानून में 33% आरक्षण के भीतर केवल एससी और एसटी महिलाओं के लिए ही प्रावधान किया गया है, जबकि ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोई कोटा नहीं रखा गया है.
राहुल गांधी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि आरक्षण लागू करने से पहले जाति जनगणना कराना आवश्यक है. उनका कहना है कि बिना जाति जनगणना के यह कानून ओबीसी महिलाओं के साथ न्याय नहीं करता.
कांग्रेस ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए ‘कोटे के अंदर कोटा’ की मांग की है, हालांकि यह व्यवस्था 2010 के उनके अपने बिल में भी शामिल नहीं थी.
मौजूदा कानून के अनुसार, महिला आरक्षण नई जनगणना के आंकड़ों और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन पर आधारित होगा. कांग्रेस का तर्क है कि इससे आरक्षण लागू होने में अनावश्यक देरी होगी और इसका इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करने के लिए भी किया जा सकता है.
हालांकि दोनों बिलों में कुछ समानताएं भी हैं. 2010 के कांग्रेस बिल और 2023 के कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को 15 वर्षों की अवधि तक लागू करने का प्रावधान है.
इसके अलावा, दोनों में ही सीटों के रोटेशन की व्यवस्था रखी गई है, जिसके तहत आरक्षित सीटें समय-समय पर बदलती रहेंगी.
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