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तीसरे चरण में यादव लैंड की बारी, 59 सीटों पर योगी-अखिलेश की परीक्षा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज है। दो चरणों के विधानसभा के चुनाव संपन्न हो चुके हैं जबकि अभी भी 5 चरणों के लिए वोट डाले जाने हैं। इन सब के बीच अब बारी यादव लैंड की है। अब तक 2 चरणों के 113 सीटों पर मतदान खत्म हो चुका है। पहले चरण में जहां जाटलैंड पर चुनाव थे तो वही दूसरे चरण में मुस्लिम बेल्ट का बोलबाला था। लेकिन अब तीसरे चरण में यादव बेल्ट और बुंदेलखंड के 59 सीटों पर चुनाव होने हैं। कुल मिलाकर देखें तो सत्तारूढ़ भाजपा और समाजवादी पार्टी के लिए यह चरण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस चरण में जिस की लहर दिखेगी उसी की सरकार लखनऊ में बनेगी। तीसरे चरण के लिए सत्तारूढ़ भाजपा समाजवादी पार्टी की ओर से पूरी ताकत झोंकी जा रही है। अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ के लिए यह चरण बेहद ही महत्वपूर्ण रहने वाला है।अखिलेश यादव की करहल सीट पर भी इसी चरण में चुनाव होने हैं। इटावा, मैनपुरी के भी इलाकों में इसी चरण में चुनाव हो रहे हैं। तीसरे चरण में 20 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। 16 जिलों की 59 सीटों पर कुल 627 उम्मीदवार मैदान में हैं। तीसरे चरण में हाथरस, फिरोजाबाद, कासगंज, एटा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, औरैया, कानपुर, कानपुर देहात, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर और महोबा जिले शामिल हैं। इनमें से 7 जिले बृज और यादव बेल्ट के हैं तो 5 जिले बुंदेलखंड के हैं। हाथरस में भी इसी चरण में चुनाव हो रहे हैं जहां दलित युवती के साथ में बलात्कार और हत्या का मुद्दा काफी बड़ा बना था। इसके अलावा बिकरू कांड वाला इलाका भी इसी चरण में शामिल है जहां विकास दुबे पुलिस एनकाउंटर और उसके एक सहयोगी अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे को जेल भेज जाने का मुद्दा भी बड़ा है।2017 के विधानसभा चुनाव में इन 59 सीटों में से 90 फ़ीसदी सीटों पर भाजपा का दबदबा रहा था। भाजपा ने 59 में से 49 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि सपा को महज 9 सीटें ही हासिल हो सकी थी। एक सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। 2017 में सत्ता में रहने के बावजूद भी अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के इस गढ़ में अपना वर्चस्व नहीं दिखा पाए थे और मोदी लहर पर सवार होकर भाजपा ने 49 सीटें जीतकर एक नया रिकॉर्ड बनाया था। भाजपा को इस बात की उम्मीद है कि 2022 के भी चुनाव में पार्टी इन 59 सीटों पर शानदार प्रदर्शन करेगी। पिछले तीन दशक में देखें तो 2017 का चुनाव भाजपा के लिए बड़ी जीत थी। एटा, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर जैसे जिलों को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। 2012 के चुनाव में सपा ने यहां क्लीनस्वीप किया था लेकिन 2017 में यहां पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब रहा था।
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