होम US-China टकराव में नया मोड़, ईरानी तेल पर बैन के बीच चीन ने चला कानूनी दांव
अमेरिका और China के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव ने अब नया रूप ले लिया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अहम कदम उठाते हुए घरेलू कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन न करने का निर्देश दिया है।
अमेरिका और China के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव ने अब नया रूप ले लिया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अहम कदम उठाते हुए घरेलू कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन न करने का निर्देश दिया है। यह फैसला खासतौर पर उन चीनी पेट्रोकेमिकल कंपनियों की सुरक्षा के लिए लिया गया है, जिन पर अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार से जुड़े होने के आरोप लगाए हैं।
चीन ने पहली बार अपने “ब्लॉकिंग स्टैच्यूट” का उपयोग किया है, जो विदेशी कानूनों के प्रभाव को देश के भीतर निष्प्रभावी करने के लिए बनाया गया एक कानूनी प्रावधान है। विशेषज्ञ इस कदम को केवल कूटनीतिक विरोध नहीं, बल्कि अमेरिका के खिलाफ कानूनी जवाबी कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं।
चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस आदेश के तहत पांच प्रमुख कंपनियों को सुरक्षा प्रदान की गई है—
अमेरिका ने इन कंपनियों को अपनी “स्पेशली डिज़िग्नेटेड नेशनल्स (SDN)” सूची में शामिल किया है, जिसके तहत उनकी संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं और उनके साथ किसी भी तरह के लेन-देन पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि 2025 से United States लगातार कार्यकारी आदेशों के जरिए चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कदमों से न केवल चीनी कंपनियों, बल्कि अन्य देशों के साथ उनके सामान्य व्यापारिक संबंध भी प्रभावित हो रहे हैं। चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक नियमों का उल्लंघन बताया है।
हाल ही में अमेरिकी ट्रेजरी के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों को चेतावनी दी थी कि चीन की छोटी स्वतंत्र तेल रिफाइनरियां, जिन्हें “टीपॉट रिफाइनरी” कहा जाता है, उनके साथ लेन-देन जोखिम भरा हो सकता है। खासकर शेडोंग प्रांत की ये रिफाइनरियां 2026 तक ईरानी कच्चे तेल के आयात और प्रोसेसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
Hengli Petrochemical पर इससे पहले भी OFAC द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, यह कंपनी ईरान से बड़े स्तर पर कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदती रही है, जिससे ईरान की तेल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह “ब्लॉकिंग” आदेश देश की संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा के लिए जारी किया गया है। साथ ही, चीनी कंपनियों के वैध अधिकारों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। चीन ने दोहराया कि वह ऐसे एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी प्राप्त नहीं है और जो अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं हैं।
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