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समाचारराजनीतिप्रादेशिकी Alert Star Digital Team Feb 19, 2026 09:17 PM

राज ठाकरे की शिंदे से सीक्रेट मीटिंग और भड़क गए उद्धव, रातों-रात ले लिया ऐसा एक्शन कि...

महाराष्ट्र की सियासत में ठाकरे ब्रदर्स के बीच एक बार फिर तनाव गहराता दिख रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों के बाद एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे की मुलाकात ने सूबे के सियासी समीकरणों में हलचल मचा दी है।

राज ठाकरे की शिंदे से सीक्रेट मीटिंग और भड़क गए उद्धव, रातों-रात ले लिया ऐसा एक्शन कि...

महाराष्ट्र की सियासत में 'ठाकरे ब्रदर्स' के बीच एक बार फिर तनाव गहराता दिख रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों के बाद एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे की मुलाकात ने सूबे के सियासी समीकरणों में हलचल मचा दी है। इस मुलाकात की खबर जैसे ही मातोश्री पहुंची, उद्धव ठाकरे ने बिना कोई देरी किए राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को एक तगड़ा राजनीतिक झटका दे दिया। शिवसेना (UBT) प्रमुख ने बीएमसी में अपने कोटे के तीनों मनोनीत नगरसेवकों (Nominated Corporators) के नामों पर मुहर लगा दी है, जिससे एमएनएस की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फिर गया है।

क्या था राज ठाकरे का प्लान और कैसे बिगड़ा खेल?

दरअसल, एमएनएस की ओर से यशवंत किल्लेदार ने यह उम्मीद जताई थी कि गठबंधन धर्म निभाते हुए उद्धव ठाकरे अपने तीन मनोनीत नगरसेवकों के कोटे में से कम से कम एक सीट राज ठाकरे की पार्टी को देंगे। राजनीतिक गलियारों में एमएनएस प्रमुख द्वारा सीधे तौर पर एक पार्षद की मांग की चर्चा थी। लेकिन, बुधवार (18 फरवरी) को जैसे ही राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आधिकारिक आवास 'नंदनवन' जाकर उनसे मुलाकात की, उद्धव गुट अलर्ट हो गया। सूत्रों के अनुसार, इस सीक्रेट मीटिंग के तुरंत बाद ही उद्धव ने कड़ा एक्शन लेते हुए अपनी पार्टी के तीन नेताओं— साईनाथ दुर्गे, माधुरी मांजरेकर और कैलाश पाठक के नामों को मंजूरी दे दी। इन नामों की आधिकारिक घोषणा 28 फरवरी को कर दी जाएगी।

गठबंधन की उस शर्त का हुआ उल्लंघन!

बीएमसी चुनाव से पहले जब राज और उद्धव ठाकरे के बीच गठबंधन की बातचीत चल रही थी, तब उद्धव की शिवसेना ने साफ शब्दों में यह शर्त रखी थी कि एमएनएस प्रमुख को बीजेपी या शिंदे गुट से किसी भी प्रकार का कोई संपर्क नहीं रखना चाहिए। चुनाव के दौरान दोनों भाई कई मंचों पर एक साथ नजर भी आए, लेकिन चुनाव नतीजों के बाद एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे की यह पहली मुलाकात थी। इसी बात को उद्धव गुट ने अपनी कट्टर विरोधी पार्टी के साथ नजदीकियां मानते हुए यह बड़ा कदम उठाया है।

बीएमसी में किसका चला था सिक्का?

आपको बता दें कि हाल ही में संपन्न हुए बीएमसी (227 सीट) के चुनावों में उद्धव और राज ठाकरे का गठबंधन बहुमत के जादुई आंकड़े (114) से कोसों दूर रह गया था। शिवसेना (यूबीटी) ने जहां 65 सीटें जीतीं, वहीं एमएनएस के खाते में सिर्फ 6 सीटें आईं। दूसरी तरफ, बीजेपी और एकनाथ शिंदे के गठबंधन ने क्लीन स्वीप किया। बीजेपी ने 89 और शिंदे गुट ने 29 सीटें जीतकर आसानी से बहुमत हासिल कर लिया। इसी प्रचंड जीत के बाद 44 सालों के लंबे सूखे को खत्म करते हुए बीजेपी की रितु तावड़े बीएमसी की मेयर चुनी गई हैं, जिसके साथ ही एशिया की सबसे अमीर महानगरपालिका से अविभाजित शिवसेना का तीन दशक पुराना वर्चस्व हमेशा के लिए खत्म हो गया।

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