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प्रादेशिकीदिल्ली Alert Star Digital Team Jul 22, 2026 06:17 PM

Delhi High Court: CJP Protest पर हाईकोर्ट सख्त, CCTV और Body Camera फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश, पुलिस को जारी हुआ नोटिस

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाए जाने से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई।

Delhi High Court: CJP Protest पर हाईकोर्ट सख्त, CCTV और Body Camera फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश, पुलिस को जारी हुआ नोटिस

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाए जाने से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को भी अगले चार सप्ताह में अपना प्रत्युत्तर दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि घटना से जुड़े सभी बॉडी कैमरा फुटेज और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे जाएं, ताकि भविष्य में जांच के दौरान इनका उपयोग किया जा सके।

इसी मामले में सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाने की पुलिस कार्रवाई को अवैध घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर भी अदालत ने फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत में दावा किया कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और बिना किसी पूर्व चेतावनी के पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की गई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। हरिहरन ने अदालत में कहा कि पहचान किए जा सकने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने भी कहा कि प्रदर्शनकारी करीब 20 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर बैठे थे और 20 जुलाई तक किसी तरह की हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई थी। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में छात्र-छात्राओं के साथ-साथ डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और विभिन्न क्षेत्रों के लोग भी मौजूद थे। उनके अनुसार, उपलब्ध वीडियो में कुछ सिविल कपड़ों में लोग भी लाठियों के साथ प्रदर्शनकारियों पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि कई वीडियो में कथित तौर पर कीलों वाली लाठियों से छात्रों की पिटाई दिखाई देती है। उनका दावा था कि 90 से अधिक छात्र घायल हुए हैं और घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने अदालत से घटना से जुड़े सभी वीडियो, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, पुलिस के बल प्रयोग संबंधी निर्देश और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।

वहीं, केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. वी. राजू ने अदालत में कहा कि उपलब्ध वीडियो में कई पुलिसकर्मी भी घायल दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना था कि शुरू में शांतिपूर्ण रहा प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गया, पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि जब भीड़ हिंसक हो जाती है तो ऐसी परिस्थितियों में पुलिस को आवश्यक कदम उठाने पड़ते हैं।

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