होम चीन को लगा बड़ा झटका! पाकिस्तान ने 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के लिए तुर्की से मिलाया हाथ, ड्रैगन की बढ़ी टेंशन

समाचारविदेश Alert Star Digital Team May 23, 2026 04:52 PM

चीन को लगा बड़ा झटका! पाकिस्तान ने 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के लिए तुर्की से मिलाया हाथ, ड्रैगन की बढ़ी टेंशन

Pakistan ने कथित तौर पर पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स को लेकर Turkey के साथ बड़ी रक्षा डील कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामाबाद 65 KAAN स्टेल्थ फाइटर जेट खरीद सकता है।

चीन को लगा बड़ा झटका! पाकिस्तान ने 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के लिए तुर्की से मिलाया हाथ, ड्रैगन की बढ़ी टेंशन

Pakistan ने कथित तौर पर पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स को लेकर Turkey के साथ बड़ी रक्षा डील कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामाबाद 65 KAAN स्टेल्थ फाइटर जेट खरीद सकता है। अगर यह समझौता आधिकारिक रूप से पक्का हो जाता है, तो इसे पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा डील्स में से एक माना जाएगा। साथ ही यह तुर्की के स्वदेशी फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए भी बड़ी सफलता साबित हो सकती है।

क्या है KAAN फाइटर जेट कार्यक्रम?

KAAN तुर्की का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान है। इसे पहले TF-X और MMU प्रोग्राम के नाम से भी जाना जाता था। यह अत्याधुनिक एयर सुपरियोरिटी मिशनों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है।

इस फाइटर जेट में लो-ऑब्जर्वेबल स्टेल्थ फीचर्स, आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम और शक्तिशाली इंजन लगाए गए हैं। तुर्की इस प्रोजेक्ट के जरिए विदेशी रक्षा कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है और घरेलू एयरोस्पेस इंडस्ट्री को मजबूत करने पर फोकस कर रहा है।

पाकिस्तान के लिए क्यों अहम मानी जा रही डील?

रिपोर्ट्स के अनुसार अगर पाकिस्तान 65 KAAN फाइटर जेट खरीदता है, तो इससे उसकी वायुसेना की ताकत में बड़ा बदलाव आ सकता है। पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स पाकिस्तान की एयर पावर और क्षेत्रीय प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

पाकिस्तान और तुर्की पहले से कई रक्षा परियोजनाओं में साथ काम कर चुके हैं। दोनों देशों ने JF-17 Thunder फाइटर जेट प्रोग्राम में भी सहयोग किया था। ऐसे में KAAN डील दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को नई मजबूती दे सकती है।

अभी तक नहीं हुई आधिकारिक पुष्टि

हालांकि इस कथित समझौते को लेकर अभी तक पाकिस्तान या तुर्की की सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय, ISPR और तुर्की की Turkish Aerospace Industries ने फिलहाल इस रिपोर्ट पर चुप्पी साध रखी है।

यही वजह है कि रक्षा विशेषज्ञ इस खबर को फिलहाल सावधानी के साथ देखने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी रक्षा डील में लंबी बातचीत, फंडिंग व्यवस्था और सरकारी मंजूरियों की प्रक्रिया शामिल होती है।

KAAN प्रोग्राम में पहले से शामिल है पाकिस्तान

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से KAAN प्रोग्राम में सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी इंजीनियर इस प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट में योगदान दे रहे हैं और दोनों देशों के बीच संयुक्त उत्पादन सुविधा स्थापित करने पर भी चर्चा जारी है।

अगर यह सहयोग आगे बढ़ता है, तो इससे तकनीकी हस्तांतरण, स्थानीय असेंबली और रक्षा उद्योग से जुड़े दीर्घकालिक फायदे दोनों देशों को मिल सकते हैं।

वैश्विक बाजार में तुर्की की बढ़ सकती है ताकत

तुर्की इन दिनों KAAN फाइटर जेट को कई मित्र देशों के बीच सक्रिय रूप से प्रमोट कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Indonesia और Azerbaijan जैसे देशों ने भी तुर्की की स्टेल्थ टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी दिखाई है।

अगर पाकिस्तान के साथ यह सौदा आधिकारिक रूप से मंजूर हो जाता है, तो वैश्विक पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट बाजार में तुर्की की स्थिति और मजबूत हो सकती है।

क्यों जरूरी है सावधानी बरतना?

हालांकि सोशल मीडिया और कुछ डिफेंस प्लेटफॉर्म्स पर इस खबर को तेजी से शेयर किया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी रक्षा डील को पूरी तरह गुप्त रखना आसान नहीं होता। फिलहाल सभी की नजर पाकिस्तान और तुर्की की ओर से आने वाले आधिकारिक बयान पर टिकी हुई है, जो कथित 15 अरब डॉलर की इस डील की स्थिति साफ कर सकता है।

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