होम चीन की बढ़ी टेंशन! ट्रंप ताइवान को देंगे F-35 और THAAD सिस्टम? अमेरिका के बड़े कदम से भड़का बीजिंग
United States और China के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ताइवान को लेकर अमेरिका के संभावित बड़े फैसले ने बीजिंग की चिंता बढ़ा दी है।
United States और China के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ताइवान को लेकर अमेरिका के संभावित बड़े फैसले ने बीजिंग की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump जल्द ही ताइवान के लिए करीब 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी दे सकते हैं, जिसमें अत्याधुनिक F-35 फाइटर जेट और THAAD डिफेंस सिस्टम शामिल होने की चर्चा है।
अमेरिका ने साफ कहा है कि ताइवान को हथियार बेचने की प्रक्रिया का Iran के साथ चल रहे युद्ध से कोई संबंध नहीं है। एक विश्वसनीय सूत्र के अनुसार, ताइवान को हथियारों की बिक्री कई वर्षों से जारी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे मौजूदा युद्ध परिस्थितियों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
हाल ही में अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया था कि ताइवान को हथियारों की सप्लाई में देरी इसलिए हो रही है क्योंकि अमेरिका को ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के लिए भारी मात्रा में गोला-बारूद की जरूरत है। हालांकि अब इस दावे को खारिज कर दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक अमेरिका के पास राष्ट्रपति ट्रंप की रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हथियार, सैन्य उपकरण और गोला-बारूद उपलब्ध हैं। अधिकारियों ने कहा कि हथियारों की बिक्री की प्रक्रिया सामान्य तौर पर लंबी होती है और इसमें कई साल लग सकते हैं।
हाल ही में Donald Trump ने चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से मुलाकात के बाद कहा था कि वह ताइवान को हथियार बेचने वाले पैकेज पर अभी अंतिम फैसला नहीं ले पाए हैं। उनके इस बयान के बाद ताइवान में चिंता बढ़ गई थी, क्योंकि वहां लंबे समय से अमेरिकी हथियार पैकेज का इंतजार किया जा रहा है।
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियार बेचने का लगातार विरोध करता रहा है। दूसरी ओर अमेरिका 1979 के ताइवान रिलेशंस एक्ट के तहत ताइवान को उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी हथियार और सैन्य सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। अमेरिकी प्रशासन ने दोहराया है that ताइवान को लेकर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
Taiwan की सरकार ने शुक्रवार को कहा कि उसे अमेरिका की ओर से हथियार बिक्री में किसी तरह की देरी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। वहीं चीन लगातार अमेरिका पर दबाव बना रहा है कि वह ताइवान को हथियारों की सप्लाई बंद करे। ताइवान का कहना है कि उसके भविष्य का फैसला वहां के लोग खुद करेंगे।
ताइवान का मुद्दा लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच सबसे संवेदनशील विवादों में शामिल रहा है। एक तरफ अमेरिका ताइवान की सुरक्षा का समर्थन करता है, जबकि चीन इसे अपना आंतरिक मामला बताता है। ईरान युद्ध और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह मामला और अधिक गंभीर होता जा रहा है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप जल्द ही इस हथियार पैकेज पर बड़ा फैसला ले सकते हैं।
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