होम ईरान-अमेरिका तनाव के बीच फंसा पाकिस्तान? अफगानिस्तान पर हमलों ने बढ़ाए बड़े सवाल
दुनिया के सामने खुद को शांतिदूत के रूप में पेश करने वाला पाकिस्तान अब नई मुश्किलों में घिरता नजर आ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने मध्यस्थ बनने की कोशिश की, लेकिन यह पहल ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी।
दुनिया के सामने खुद को शांतिदूत के रूप में पेश करने वाला पाकिस्तान अब नई मुश्किलों में घिरता नजर आ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने मध्यस्थ बनने की कोशिश की, लेकिन यह पहल ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी। इस्लामाबाद में बातचीत का पहला दौर विफल रहा और दूसरे दौर से पहले ही ईरान ने सीधी बातचीत से इनकार कर दिया, जिससे पाकिस्तान की कोशिशों को झटका लगा और उसे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
इसी बीच पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले कर दिए, जिनमें यूनिवर्सिटी और आम नागरिकों को निशाना बनाया गया। इन हमलों के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि एक तरफ पाकिस्तान खुद को शांति का समर्थक दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर वह पड़ोसी देश पर उकसावे वाली कार्रवाई कर रहा है। माना जा रहा है कि ईरान-अमेरिका बातचीत के ठप होने के बाद पाकिस्तान इस समीकरण से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है।
ईरान द्वारा बातचीत से इनकार के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो बमबारी की जाएगी। वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की बात कही है और संकेत दिया है कि उसका पलटवार कहीं ज्यादा तीव्र हो सकता है। इस बढ़ते तनाव ने पाकिस्तान की स्थिति को और जटिल बना दिया है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र के कई देश इस संघर्ष में शामिल हो सकते हैं।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा सहयोग का मजबूत समझौता है, जिसके तहत किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाता है। ऐसे में यदि सऊदी अरब पर ईरान हमला करता है, तो पाकिस्तान को सैन्य सहयोग देना पड़ सकता है। हाल ही में पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में सैनिक और लड़ाकू विमान भी तैनात किए हैं। इस स्थिति में ईरान के खिलाफ खुलकर खड़े होने से पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति और छवि दोनों पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के भीतर करीब 20 प्रतिशत शिया आबादी है, ऐसे में ईरान के खिलाफ सीधी कार्रवाई घरेलू स्तर पर भी असर डाल सकती है। यही वजह मानी जा रही है कि पाकिस्तान ने सीधे टकराव से बचते हुए अफगानिस्तान में कार्रवाई की, जहां उसने शहरी इलाकों को निशाना बनाया।
हाल के दिनों में पाकिस्तान ने काबुल और अफगानिस्तान के अन्य शहरों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। यह कार्रवाई उस समय हुई जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने भी प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया।
अफगानिस्तान के अनुसार, कुनार प्रांत में स्थित सैयद जमालुद्दीन अफगानी यूनिवर्सिटी को नुकसान पहुंचा है और नागरिकों के घर भी तबाह हुए हैं। इस हमले में 10 लोगों की मौत हुई, जबकि 80 से अधिक लोग घायल बताए गए हैं। इससे पहले इस्लामाबाद की एक मस्जिद में हुए आत्मघाती हमले में 30 लोगों की जान गई थी, जिसके लिए पाकिस्तान लंबे समय से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को जिम्मेदार ठहराता रहा है।
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