होम Mission Axiom-4: एक बार फिर टला मिशन एक्ज़ियम-4, लखनऊ के शुभांशु की अंतरिक्ष यात्रा में देरी
Mission Axiom-4: एक बार फिर टला मिशन एक्ज़ियम-4, लखनऊ के शुभांशु की अंतरिक्ष यात्रा में देरी
लखनऊ। राजधानी निवासी भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की बहुप्रतीक्षित यात्रा को एक बार फिर टालना पड़ा है। इस बार मिशन एक्ज़ियम-4 (Mission Axiom-4) में तकनीकी खामी सामने आने के कारण उड़ान रद्द कर दी गई।
हालांकि इससे लखनऊवासियों और अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वालों को थोड़ी मायूसी जरूर हुई, लेकिन शुभांशु के परिजनों और शुभचिंतकों का कहना है कि सुरक्षा पहले है। मिशन भले देरी से हो, लेकिन सफलता और सुरक्षा के साथ हो, यही सबसे ज़रूरी है।
शुभांशु के पिता शंभू दयाल शुक्ल ने बताया कि अगर सबकुछ योजना के अनुसार चलता, तो बुधवार शाम को पूरे भारतवासी शुभांशु की अंतरिक्ष यात्रा का लाइव प्रसारण देख रहे होते। उन्होंने कहा,
“अच्छा हुआ कि यान में गड़बड़ी समय रहते पकड़ में आ गई। यात्रा चाहे देर से हो, लेकिन सुरक्षित और सफल होनी चाहिए।”
शुभांशु के घर पर लगातार शुभकामनाएं देने वालों का तांता लगा रहा। मां आशा देवी ने बताया कि उन्हें बेटे की कॉल का इंतज़ार है ताकि मिशन की मौजूदा स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सके।
इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला के विज्ञान अधिकारी डॉ. सुमित कुमार श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बताया कि रॉकेट के बूस्टर स्टेज की टेस्टिंग के दौरान ऑक्सीजन लीक का पता चला।
इसी कारण से मिशन को रोक दिया गया है। फिलहाल नई लॉन्चिंग तारीख की घोषणा नहीं की गई है।
मिशन एक्ज़ियम-4 की उड़ान पहले भी कई बार स्थगित की जा चुकी है:
अंतरिक्ष में मौजूद अंतरिक्ष स्टेशन और यान पृथ्वी के चारों ओर लगभग 28,800 किमी/घंटा की रफ्तार से चक्कर लगाते हैं। इस वजह से वहां हर 90 मिनट में एक बार सूर्योदय और एक बार सूर्यास्त होता है।
असल में सुबह और रात का सही पता लगाने के लिए वहां यूनिवर्सल टाइम (लंदन समय) का उपयोग किया जाता है।
शुभांशु की अंतरिक्ष यात्रा के दौरान स्पेशल पैक्ड फूड साथ होगा। सूत्रों के अनुसार, वह मूंग दाल हलवा, गाजर का हलवा, राजमा-चावल, जयपुरी मिक्स वेज जैसे कुछ पारंपरिक भारतीय व्यंजन ले जाएंगे।
अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होने के कारण वहां का टॉयलेट सिस्टम सामान्य नहीं होता। वहां वैक्यूम टॉयलेट का प्रयोग किया जाता है जो मल को एक विशेष टैंक में खींच लेता है।
पानी की भारी कमी के चलते वहां यूरिन को फिल्टर कर पीने के पानी में बदला जाता है – यह प्रक्रिया अंतरिक्ष जीवन की एक अहम जरूरत है।
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।