होम सिराथू सीट पर फिर खिलेगा कमल या होगा बदलाव, केशव मौर्य पर है सफलता दोहराने की जिम्मेदारी
सिराथू सीट पर फिर खिलेगा कमल या होगा बदलाव, केशव मौर्य पर है सफलता दोहराने की जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां काफी तेज है। 7 चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए आज पहले चरण का मतदान भी हो रहा है। इन सब के बीच सबकी निगाहें हॉट सीटों पर टिकी हुई है जहां से दिग्गज अपना सियासी किस्मत आजमा रहे हैं। इन्हीं सीटों में से 1 सीट है सिराथू। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जनपद में पड़ने वाली सिराथू सीट से भाजपा ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को चुनावी मैदान में उतारा है। देश के 51 शक्तिपीठों में से एक कड़ा का शीतला धाम सिराथू विधानसभा क्षेत्र में स्थित है जहां माता सती का हाथ गिरा था। इसका मतलब साफ है कि सिराथू का पौराणिक महत्व भी है और धार्मिक भी। हर साल आषाढ़ मास की सप्तमी और अष्टमी को यहां भव्य मेले का आयोजन होता है।
राजनीतिक हिसाब से देखें तो पहली बार सिराथू से 1962 में अस्तित्व में आई थी। तब से लेकर अब तक यहां से कई बड़े नेता विधायक बन चुके हैं। 1962 में पहली बार यहां से कांग्रेस के बड़े नेता रहे हेमवती नंदन बहुगुणा विधायक चुने गए थे। 1967 और 1985 में भी कांग्रेस को यहां का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। 1993 से लेकर 2007 तक के यहां बसपा का दबदबा रहा और पार्टी के ही विधायक चुने गए। हालांकि भाजपा ने यहां 2012 में केशव प्रसाद मौर्य को उतारा और उसने जीत हासिल की। केशव प्रसाद मौर्य की भी यह पहली जीत थी।
इस जीत के बाद केशव प्रसाद मौर्य की लगातार तरक्की होती रही। 2014 में वह फूलपुर से सांसद चुने गए तो 2016 में उन्हें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने का मौका मिल गया। उन्हीं के अध्यक्ष रहते हुए ही उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी और उन्हें उप मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। 2014 के उपचुनाव में यहां समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी। हालांकि 2017 में यह सीट फिर से भाजपा के पास ही आ गई। इस बार भाजपा ने कहीं ना कहीं अपने दिग्गज उम्मीदवार को इस सीट पर उतारा है।
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