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समाचारदेशराजनीति Alert Star Digital Team Jul 30, 2025 02:57 PM

कान खोलकर सुन लें, मोदी-ट्रंप की नहीं हुई बात: राज्यसभा में गरजे जयशंकर, विपक्ष को दिया करारा जवाब

राज्यसभा में बुधवार को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने विपक्ष के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। खासतौर पर ऑपरेशन सिन्दूर और सिंधु जल संधि को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया और इतिहास को लेकर विपक्ष की चुनिंदा याददाश्त पर तंज कसते हुए कहा..

कान खोलकर सुन लें, मोदी-ट्रंप की नहीं हुई बात: राज्यसभा में गरजे जयशंकर, विपक्ष को दिया करारा जवाब

राज्यसभा में बुधवार को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने विपक्ष के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। खासतौर पर ऑपरेशन सिन्दूर और सिंधु जल संधि को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया और इतिहास को लेकर विपक्ष की 'चुनिंदा याददाश्त' पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग इतिहास से डरते हैं और जो बातें उन्हें पसंद नहीं, उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।

'कान खोलकर सुन लें, ट्रंप-मोदी की कोई बातचीत नहीं हुई'

विपक्ष की ओर से यह दावा किया जा रहा था कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर में भूमिका निभाई थी। इस पर जयशंकर ने दो टूक कहा:

“मैं उनको कहना चाहता हूं, वो कान खोलकर सुन लें। 22 अप्रैल से 16 जून तक, एक भी फोन राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच में नहीं हुआ।”

इस बयान से उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह स्वतंत्र और निर्णायक है, और किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को स्वीकार नहीं किया गया।

नेहरू की नीतियों पर सीधा सवाल

जयशंकर ने 1960 की सिंधु जल संधि को लेकर पंडित जवाहरलाल नेहरू की सोच पर सवाल उठाए। उन्होंने संसद में दिए नेहरू के बयान को उद्धृत करते हुए कहा:

“30 नवंबर 1960 को नेहरू ने कहा था कि संसद को पानी या पैसे के लेन-देन पर चर्चा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ये संधि पाकिस्तानी पंजाब के हित में है, लेकिन उन्होंने कश्मीर, पंजाब, राजस्थान या गुजरात के किसानों के बारे में एक शब्द नहीं कहा।”

विदेश मंत्री ने इस नीति को उस समय की "गंभीर भूल" बताते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने उस गलती को कभी सुधारा ही नहीं।

'मोदी सरकार ने नेहरू की गलतियों को सुधारा'

जयशंकर ने जोर देकर कहा कि आज की सरकार भविष्य की नहीं, इतिहास की गलतियों को भी सुधार रही है। उन्होंने कहा:

“हमें 60 साल तक बताया गया कि कुछ नहीं हो सकता। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिखाया कि यह मुमकिन है। अनुच्छेद 370 को हटाया गया, और अब सिंधु जल संधि की समीक्षा भी हो रही है।”

'खून और पानी साथ नहीं बह सकते'

पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए जयशंकर ने दो टूक कहा:

“जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, सिंधु जल संधि पर अमल नहीं होगा। हमने साफ कर दिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।”

उनका यह बयान दर्शाता है कि भारत अब पहले जैसी नरम नीति नहीं अपनाने जा रहा है, और आतंकवाद को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

विपक्ष को चेतावनी: इतिहास से सबक लीजिए

अपने संबोधन के अंत में जयशंकर ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो पार्टी इतिहास से नहीं सीखती, वह बार-बार वही गलतियां दोहराती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की विदेश नीति मजबूत, स्पष्ट और देशहित में है, और अब भारत की आवाज वैश्विक मंचों पर गंभीरता से सुनी जाती है।

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