होम ईरान संकट से महंगा हुआ कच्चा तेल, क्या भारत में बढ़ेगी महंगाई? वित्त मंत्री सीतारमण ने दिया बड़ा जवाब
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। इस पर केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कहा है कि तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में महंगाई पर इसका असर सीमित रह सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। इस पर केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कहा है कि तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में महंगाई पर इसका असर सीमित रह सकता है।
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। चार साल में पहली बार क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर के पार जाकर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
साथ ही ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बंद करने की धमकी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी देशों से दुनिया भर में तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत तेल आयात से पूरा करता है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहने पर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
संसद में दिए लिखित जवाब में Nirmala Sitharaman ने कहा कि फिलहाल देश में वस्तुओं की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर हैं। इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का महंगाई पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
उन्होंने बताया कि सोमवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में लगभग 26 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Ali Khamenei की मौत के बाद उनके बेटे Mojtaba Khamenei को ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया है।
हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस नियुक्ति को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। वहीं Israel ने भी ईरान के नए नेतृत्व को लेकर कड़ी चेतावनी दी है।
वित्त मंत्री ने बताया कि मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से पहले पिछले एक साल में इंडियन क्रूड बास्केट की कीमतों में गिरावट का रुख था।
लेकिन फरवरी के अंत में इसकी कीमत 69.01 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 2 मार्च को 80.16 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इसके बावजूद सरकार का मानना है कि भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका असर फिलहाल सीमित रहेगा।
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