होम जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले विपक्ष में दरार, महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने रखीं बड़ी शर्तें

समाचारदेशराजनीति Alert Star Digital Team Jul 18, 2026 05:02 PM

जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले विपक्ष में दरार, महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने रखीं बड़ी शर्तें

J&K Politics: महबूबा मुफ्ती की NC को दो टूक, ‘Article 370 और राजनीतिक कैदियों का मुद्दा नहीं तो प्रदर्शन में नहीं होंगे शामिल’

जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले विपक्ष में दरार, महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने रखीं बड़ी शर्तें

20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले जम्मू-कश्मीर की राजनीति में विपक्षी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी आंदोलन में तभी शामिल होगी, जब आर्टिकल 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई को प्रदर्शन के एजेंडे में प्रमुख स्थान दिया जाएगा। फिलहाल प्रस्तावित प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग है।

फारूक अब्दुल्ला को लिखे पत्र में साफ किया पार्टी का रुख

महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला को भेजे एक आधिकारिक पत्र में PDP का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने गहन विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया है कि वह जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में तभी हिस्सा लेगी, जब आर्टिकल 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई आंदोलन का केंद्रीय मुद्दा बनाया जाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "गहरी सोच-विचार के बाद PDP ने जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में तभी शामिल होने का फैसला किया है, जब आर्टिकल 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई एजेंडे का मुख्य हिस्सा हो."

'सिर्फ राज्य का दर्जा मांगना पर्याप्त नहीं'

महबूबा मुफ्ती ने मौजूदा स्वरूप में मिले प्रदर्शन के निमंत्रण को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि यदि आंदोलन को केवल राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित रखा गया, तो इससे 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसलों को अप्रत्यक्ष रूप से वैध ठहराने का संदेश जाएगा।

उन्होंने कहा, "सिर्फ़ राज्य का दर्जा पाने की मांग तक सीमित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का मतलब होगा आर्टिकल 370 के लिए चल रहे बड़े संवैधानिक संघर्ष को खत्म कर देना, और इस तरह BJP के 5 अगस्त, 2019 के कदमों को जायज ठहराना, जिन्हें उन्होंने गैर-कानूनी बताया था."

महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में यह भी लिखा, "हमारी लड़ाई संवैधानिक अधिकारों के लिए है, न कि सिर्फ़ दिखावे के लिए." उनका कहना है कि यदि राजनीतिक संघर्ष को केवल राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित कर दिया गया, तो इससे 2019 के बाद स्थापित भाजपा के नैरेटिव को मजबूती मिलेगी।

PDP ने एजेंडे में शामिल करने की रखी ये मांगें

PDP प्रमुख ने कहा कि यदि उनकी पार्टी को आंदोलन का हिस्सा बनना है, तो एजेंडे में आर्टिकल 370 और 35A की बहाली, देशभर की जेलों में बंद कश्मीरी राजनीतिक कैदियों की तत्काल रिहाई और जमात-ए-इस्लामी जैसे सामाजिक-राजनीतिक संगठनों पर लगी पाबंदियों को हटाने की मांग भी शामिल होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस और PDP दोनों ने अपने घोषणापत्र में आर्टिकल 370 की बहाली का वादा किया था। उनके अनुसार, नेशनल कॉन्फ्रेंस को जनता का समर्थन भी इसी संवैधानिक वादे के आधार पर मिला था।

सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपील

महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में यह भी कहा कि उनके पहले दिए गए राजनीतिक सुझावों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व से सभी क्षेत्रीय दलों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को साथ लेकर व्यापक सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपील की, ताकि साझा रणनीति और आगे की रूपरेखा तैयार की जा सके।

उधर, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन भी पहले ही जंतर-मंतर प्रदर्शन का निमंत्रण ठुकरा चुके हैं। उनका कहना है कि केवल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करना 2019 के संवैधानिक बदलावों के मूल मुद्दे को पीछे धकेलने जैसा होगा।

वहीं, मीरवाइज उमर फारूक ने भी इस अभियान का समर्थन करते हुए कहा है कि आंदोलन के मंच पर आर्टिकल 370 और राजनीतिक कैदियों की रिहाई का मुद्दा भी शामिल किया जाना चाहिए।

हालांकि, विपक्षी दलों के बीच मतभेद के बावजूद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन की योजना में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी संसद सत्र के दौरान राजधानी में अपनी बात मजबूती से रखेगी और पीछे नहीं हटेगी।

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