होम क्या अगस्त में पेट्रोल-डीजल के दाम मचा देंगे हाहाकार? ईरान-अमेरिका तनाव के बीच तेल बाजार को लेकर आई बड़ी चेतावनी
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। भले ही दोनों देशों के बीच फिलहाल सीजफायर लागू है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति पूरी तरह सामान्य कब होगी, इसे लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं।
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। भले ही दोनों देशों के बीच फिलहाल सीजफायर लागू है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति पूरी तरह सामान्य कब होगी, इसे लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं। इसी बीच अबू धाबी की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने तेल बाजार को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है।
कंपनी का कहना है कि यदि मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रहे तो आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है, जिसका असर दुनिया भर के ईंधन बाजार पर पड़ेगा।
Al Arabiya की रिपोर्ट के अनुसार ADNOC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आशंका जताई है कि ईरान युद्ध के कारण तेल आपूर्ति में आने वाली बाधाएं यदि जारी रहती हैं और वैश्विक मांग बढ़ती है, तो अगस्त 2026 से तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हो सकती है।
अधिकारी ने यह भी कहा कि भले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह खोल दिया जाए, फिर भी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सामान्य स्थिति में लौटने में करीब एक साल तक का समय लग सकता है। ऐसे में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
ADNOC के सेल्स एंड ट्रेडिंग के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट फिलिप खूरी के अनुसार क्षेत्र में शांति को लेकर जब तक पूरी स्पष्टता नहीं आती, तब तक तेल टैंकरों की आवाजाही पहले जैसी नहीं हो पाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल परिवहन की क्षमता कुछ समय तक सीमित रह सकती है।
इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है। यदि सप्लाई प्रभावित रहती है और मांग बढ़ती है तो कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 जून 2026 को कहा कि ईरान के साथ बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। हालांकि दूसरी ओर तेहरान की तरफ से नए हमलों की खबरों ने सीजफायर की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा, "ईरान के साथ बातचीत ती गति से जारी है."
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच जारी संघर्षविराम अभी भी नाजुक स्थिति में है। जवाबी हमलों और सैन्य गतिविधियों के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किसी अंतिम समझौते तक पहुंचने में कितना समय लगेगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में तेल बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान संबंधों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि क्षेत्र में तनाव कम नहीं हुआ तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों की निगाहें मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम और तेल आपूर्ति की बहाली पर टिकी हुई हैं।
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