होम संसद में इकरा हसन का तीखा हमला, खामेनेई का जिक्र कर विदेश नीति पर घेरा सरकार को
समाजवादी पार्टी की कैराना लोकसभा सांसद इकरा हसन ने मंगलवार (24 मार्च) को संसद में चर्चा के दौरान केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कमजोर विदेश नीति के कारण देश महंगाई और आपूर्ति संकट की स्थिति के करीब पहुंच गया है।
समाजवादी पार्टी की कैराना लोकसभा सांसद इकरा हसन ने मंगलवार (24 मार्च) को संसद में चर्चा के दौरान केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कमजोर विदेश नीति के कारण देश महंगाई और आपूर्ति संकट की स्थिति के करीब पहुंच गया है।
सदन में बोलते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार के अनुसार देश में भंडार पर्याप्त है, तो फिर जरूरी वस्तुओं की कीमतें लगातार क्यों बढ़ रही हैं। उनके मुताबिक विदेश नीति साहस और स्पष्टता के साथ चलनी चाहिए।
अपने भाषण के दौरान इकरा हसन ने ईरान के सुप्रीम लीडर का उल्लेख करते हुए कहा, "विदेश नीति साहस और स्पष्टता से ही चलती है. इसको ईरान के शहीद सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अपनी शहादत से साबित किया. कभी 56 इंज की छाती का दावा नहीं किया बल्कि जब जरूरत पड़ी तो अमेरिका के सामने झुकने की बजाय शहादत को गले लगाना पसंद किया."
उनके इस बयान के बाद सदन में राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
इकरा हसन ने दावा किया कि हाल के समय में सरकार ने दो बड़े फैसलों में गंभीर गलतियां की हैं, जिसका असर आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील और अमेरिकी दबाव के सामने झुकना देश के हित में नहीं रहा।
उन्होंने कहा कि पहले खाड़ी क्षेत्र में भारत की विदेश नीति स्वतंत्र और संतुलित मानी जाती थी, लेकिन अब भारत दूसरे देशों के संघर्षों में उलझकर नुकसान उठा रहा है।
सांसद ने कहा कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते विवाद का सबसे ज्यादा आर्थिक असर एशिया में भारत पर पड़ा है। उनके अनुसार चीन सस्ते तेल के जरिए अपने नागरिकों को राहत दे रहा है, जबकि भारत में एलपीजी और पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान जैसे पुराने सहयोगी देश के कठिन समय में भारत खुलकर समर्थन नहीं कर पाया, जिसके कारण अब गैस आपूर्ति के लिए बार-बार अनुरोध करना पड़ रहा है।
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर इकरा हसन ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा, "देश के किसानों के अमेरिका के अमीर किसानों के हाथों बेचा."
उन्होंने आगे कहा, "अगर ट्रेड डील करनी ही थी तो देश के किसानों को अमेरिका के किसानों की तरह भारी सब्सिडी देते और उन्हें तैयार करते. ये तो ऐसा है जैसे दौड़ में किसी के हाथ-पैर को जंजीर से बांध दिए गए और फिर कहा जाए कि अब दौड़कर दिखाओ."
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