होम Sukesh Chandrasekhar ने Trial Court के फैसले को High Court में दी चुनौती, जज बनकर कॉल करने के मामले में मांगी राहत
ठगी के मामलों में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर ने 2017 के एक भ्रष्टाचार मामले से जुड़े फोन कॉल प्रकरण में ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
ठगी के मामलों में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर ने 2017 के एक भ्रष्टाचार मामले से जुड़े फोन कॉल प्रकरण में ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। आरोप है कि सुकेश ने जमानत दिलाने के उद्देश्य से एक स्पेशल जज को प्रभावित करने के लिए खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर फोन किया था। अब उसने ट्रायल कोर्ट के फैसले में उसके खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों को हटाने की मांग की है।
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में सुकेश चंद्रशेखर ने दावा किया है कि ट्रायल कोर्ट ने उसके बारे में कई ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनकी मामले का न्यायिक फैसला करने के लिए कोई आवश्यकता नहीं थी। उसका कहना है कि किसी आरोपी के खिलाफ फैसला उसके चरित्र के आधार पर नहीं, बल्कि मामले में पेश किए गए सबूतों के आधार पर होना चाहिए।
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुकेश ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट ने मामले की सुनवाई पहले से बनी प्रतिकूल मानसिकता के साथ की। उसने यह भी दावा किया कि बचाव पक्ष को अपने सबूत पूरे करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
सुकेश ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में अपनी भूमिका को लेकर की गई कथित अपमानजनक, निंदात्मक और गैर-जरूरी टिप्पणियों को हटाने की मांग की है। उसका तर्क है कि न्यायिक फैसला केवल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।
यह मामला 28 अप्रैल 2017 को किए गए एक फोन कॉल से संबंधित है। उस समय सुकेश चंद्रशेखर पहले से ही भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में पुलिस हिरासत में था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसने पुलिस कांस्टेबल मनजीत के मोबाइल फोन का एक्सेस हासिल किया था।
आरोप है कि इसी मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए सुकेश ने उस समय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहीं स्पेशल जज पूनम चौधरी के आधिकारिक लैंडलाइन और मोबाइल नंबर पर संपर्क किया था।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, फोन कॉल के दौरान सुकेश ने खुद को सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर पेश किया था। कथित तौर पर उसका उद्देश्य स्पेशल जज को प्रभावित कर भ्रष्टाचार के मामले में किसी आरोपी को जमानत दिलाने की कोशिश करना था।
इसी मामले को लेकर सुकेश पर सरकारी अधिकारी की पहचान अपनाने और फोन के जरिए कथित आपराधिक धमकी देने से संबंधित धाराओं में मुकदमा चलाया गया।
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 20 अगस्त को सुकेश चंद्रशेखर को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 170, धारा 189 और धारा 507 के तहत दोषी ठहराया था। धारा 170 लोक सेवक का प्रतिरूपण करने, धारा 189 लोक सेवक को चोट पहुंचाने की धमकी देने और धारा 507 अनजान कम्युनिकेशन के जरिए आपराधिक धमकी से संबंधित है।
ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में इस घटना को न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और उसकी पवित्रता पर सीधा हमला करार दिया था। अब सुकेश ने इसी फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट के सामने चुनौती दी है और विशेष रूप से फैसले में उसके खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की है।
अब हाई कोर्ट में सुकेश की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह देखा जाएगा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले और उसमें की गई टिप्पणियों को लेकर उसकी आपत्तियों पर अदालत क्या रुख अपनाती है।
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