होम बिलासपुर Custody Death Case में CBI का बड़ा Action, श्रवण सूर्यवंशी की मौत की जांच अब केंद्रीय एजेंसी के हाथ
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में जनवरी 2024 में पुलिस हिरासत से जुड़े 35 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने FIR दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 12 अगस्त 2026 के आदेश के बाद हुई है।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में जनवरी 2024 में पुलिस हिरासत से जुड़े 35 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने FIR दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 12 अगस्त 2026 के आदेश के बाद हुई है। मामले में अब केंद्रीय एजेंसी यह पता लगाएगी कि श्रवण की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या उसकी हिरासत के दौरान किसी तरह की हिंसा या लापरवाही हुई थी।
CBI ने अपनी जांच के लिए पिछले महीने 30 जुलाई को सिविल लाइन्स थाने में दर्ज FIR नंबर 1036 को आधार बनाया है। जांच एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों और घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। फिलहाल CBI की ओर से दस्तावेजों में आरोपी के नाम के स्थान पर अज्ञात व्यक्ति का उल्लेख किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को मामले की जांच कर 13 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को खंगाला जा रहा है।
अदालत के निर्देश के बाद अब जांच में सिर्फ श्रवण की मौत की परिस्थितियों पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने 12 अगस्त 2026 को दिए अपने आदेश में कहा था कि CBI यह जांच करेगी कि श्रवण उर्फ सरवन की हिरासत में मौत किन परिस्थितियों में हुई। अगर जांच के दौरान किसी अधिकारी की भूमिका हिरासत में हिंसा के लिए सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा उन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में उचित कार्रवाई नहीं की। ऐसे में CBI के सामने घटना के साथ-साथ उसके बाद उठाए गए प्रशासनिक और कानूनी कदमों की भी पड़ताल करने की जिम्मेदारी है।
जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर पुलिस ने श्रवण को 17 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने अगले दिन यानी 18 जनवरी को उसके पास से छह लीटर महुआ शराब बरामद होने का दावा किया था। इसके बाद 19 जनवरी को आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से श्रवण को जेल भेज दिया गया।
जेल जाने के दो दिन बाद 21 जनवरी को श्रवण की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया और हालत गंभीर होने पर सिम्स अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान 22 जनवरी की देर रात उसकी मौत हो गई।
श्रवण की मौत के बाद उसके परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। परिवार का आरोप था कि पुलिस ने श्रवण को करीब 36 घंटे तक हिरासत में रखकर उसके साथ मारपीट की थी और इसी कथित पुलिस मारपीट के कारण उसकी मौत हुई।
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद CBI इस मामले की पूरी परिस्थितियों की जांच कर रही है। जांच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि श्रवण की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था और क्या उसकी हिरासत के दौरान किसी अधिकारी की भूमिका जिम्मेदार थी। 13 अक्टूबर की अगली सुनवाई से पहले CBI की रिपोर्ट इस मामले की आगे की कानूनी दिशा तय करने में अहम हो सकती है।
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