होम गैस संकट से ठप हुई कमाई, कमर्शियल LPG की कमी ने गिग वर्कर्स को किया बेहाल
देश में कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कमी का असर अब फूड डिलीवरी और गिग इकोनॉमी से जुड़े लाखों कामगारों पर साफ दिखाई देने लगा है।
देश में कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कमी का असर अब फूड डिलीवरी और गिग इकोनॉमी से जुड़े लाखों कामगारों पर साफ दिखाई देने लगा है। Gig and Platform Service Workers Union (GIPSWU) ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री Mansukh Mandaviya को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
यूनियन का कहना है कि गैस की कमी के कारण हजारों डिलीवरी वर्कर्स और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों की आजीविका पर सीधा खतरा पैदा हो गया है।
यूनियन के अनुसार मध्य-पूर्व में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट की वजह से भारत में कमर्शियल LPG सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर रेस्टोरेंट, ढाबों, क्लाउड किचन, कैटरिंग सेवाओं और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं पर पड़ा है, जो पूरी तरह कमर्शियल गैस पर निर्भर हैं।
गैस की कमी के कारण कई जगह खाना बनना प्रभावित हुआ है, जिससे ऑनलाइन फूड ऑर्डर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
यूनियन का दावा है कि मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे और जयपुर जैसे बड़े शहरों में फूड डिलीवरी ऑर्डर 50 से 60 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। इसका सबसे बड़ा असर उन डिलीवरी पार्टनर्स पर पड़ा है जिनकी आय पूरी तरह ऑर्डर संख्या पर निर्भर रहती है।
कई वर्कर्स का कहना है कि ऑर्डर घटने से उनकी रोजाना कमाई अचानक गिर गई है और आर्थिक संकट गहराने लगा है।
यूनियन ने आरोप लगाया है कि कम एक्टिविटी के आधार पर कुछ प्लेटफॉर्म कंपनियां वर्कर्स की आईडी डिएक्टिवेट करने की चेतावनी दे रही हैं। अगर ऐसा हुआ तो हजारों गिग वर्कर्स के सामने बेरोजगारी का खतरा खड़ा हो सकता है।
यूनियन के मुताबिक यह केवल गैस आपूर्ति का मुद्दा नहीं बल्कि लाखों परिवारों की रोजी-रोटी से जुड़ा संकट है।
स्थिति को देखते हुए यूनियन ने केंद्र सरकार से कई तात्कालिक कदम उठाने की मांग की है—
यूनियन ने सुझाव दिया है कि कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के तहत गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा, दुर्घटना बीमा और आय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
साथ ही केंद्र सरकार से अपील की गई है कि अगले 48 घंटों के भीतर प्लेटफॉर्म कंपनियों और तेल कंपनियों के साथ बैठक कर समाधान निकाला जाए, ताकि फूड डिलीवरी सेवाएं सामान्य हो सकें और वर्कर्स की आजीविका सुरक्षित रह सके।
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