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समाचारदेश Alert Star Digital Team Nov 5, 2026 05:15 PM

SIR पर Bombay High Court का बड़ा आदेश: वोटर लिस्ट से हटाए गए 6 नाम 10 दिन में जोड़ने होंगे, ECI को लगाई फटकार

गोवा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को अहम निर्देश दिया है।

SIR पर Bombay High Court का बड़ा आदेश: वोटर लिस्ट से हटाए गए 6 नाम 10 दिन में जोड़ने होंगे, ECI को लगाई फटकार

गोवा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को अहम निर्देश दिया है। अदालत ने निर्वाचन आयोग (ECI) से कहा है कि SIR के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए परेश सालगांवकर और उनके परिवार के पांच सदस्यों समेत कुल छह लोगों के नाम दोबारा शामिल किए जाएं। गुरुवार को गोवा बेंच ने चार दिनों तक चली सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। मामले की सुनवाई जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसांडेकर की खंडपीठ ने की।

परेश सालगांवकर और परिवार के सदस्यों को मिली राहत

यह मामला गोवा के सांता क्रूज विधानसभा क्षेत्र के निवासी परेश सालगांवकर और उनके परिवार से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और पता बदलने के लिए जमा किए गए फॉर्म-8 को खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि परेश सालगांवकर और उनके परिवार के पांच सदस्यों के पते का सत्यापन करने के बाद 10 दिनों के भीतर उनके नाम मतदाता सूची में बहाल किए जाएं। याचिकाकर्ताओं ने पता बदलने के लिए निर्धारित फॉर्म-8 जमा किया था, इसके बावजूद SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।

चुनाव आयोग ने याचिका खारिज करने की मांग की थी

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से मामले की कार्यवाही स्थगित रखने का अनुरोध किया था। आयोग का कहना था कि गोवा में दाखिल याचिका पूरी SIR प्रक्रिया को चुनौती देने से जुड़ी है, जिसमें मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया भी शामिल है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने आयोग की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं ने पूरी SIR प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी है, बल्कि उनके नाम हटाए जाने और फॉर्म-8 खारिज किए जाने के फैसले पर सवाल उठाया है।

वोटर लिस्ट से नाम हटाने वाले ऑटोमैटिक सिस्टम पर सवाल

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट ने पहले भी टिप्पणी की थी कि यह मामला देश के अन्य हिस्सों में चल रही SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाले मामलों से अलग है। गोवा में मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग के ऑटोमैटिक सिस्टम पर भी सवाल उठाए। इस व्यवस्था के तहत मतदाता का पता बदलने पर उसका नाम सीधे वोटर लिस्ट से हट सकता है। अदालत ने माना कि इस तरह की स्वचालित प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं को परेशानी हो सकती है।

फॉर्म-8 और फॉर्म-6 की प्रक्रिया पर भी जताई चिंता

हाईकोर्ट ने कहा कि मतदाताओं से पुराने पते के लिए एन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाना उन्हें गलत घोषणा करने की स्थिति में डाल सकता है। अदालत ने ऐसी स्थिति पर भी चिंता जताई, जिसमें दूसरे स्थान पर चले गए मतदाताओं के फॉर्म-8 खारिज हो जाते हैं और उन्हें मजबूरी में फॉर्म-6 भरना पड़ता है। इस फॉर्म में उन्हें यह घोषणा करनी पड़ सकती है कि वे किसी अन्य स्थान पर पंजीकृत नहीं हैं।

अदालत ने जोर देकर कहा कि किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटाने से पहले उसे अपनी बात रखने का उचित अवसर देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। मतदाता सूची के संशोधन के दौरान इस प्रक्रिया की अनदेखी नहीं की जा सकती।

ECI को हाईकोर्ट की नसीहत, पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न हो

हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को याद दिलाया कि वह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने वाली संस्था है। उसका दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ड्राफ्ट SIR सूची में किसी व्यक्ति का नाम नहीं होना और पहले से दर्ज नाम को हटाना दो अलग-अलग स्थितियां हैं।

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