होम UP Election 2027: सपा-कांग्रेस में सीटों पर फंसा पेंच, 200 सीटों की डिमांड से बढ़ी सियासी हलचल!
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान के संकेत मिलने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान के संकेत मिलने लगे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस जितनी सीटों की मांग कर रही है, सपा उसके मुकाबले करीब एक तिहाई सीटें ही देने के पक्ष में है। वहीं, कांग्रेस ने रायबरेली और अमेठी की सभी 10 विधानसभा सीटों पर अपना दावा जताया है। ऐसे में दोनों दलों के बीच गठबंधन की सीटों को लेकर सहमति बनना आसान नहीं दिख रहा है।
सपा और कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग बयानों के बीच सपा के एक वरिष्ठ नेता ने स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "चाय उतनी गर्म नहीं है जितनी केतली गर्म लग रही है." इस बयान से संकेत मिलता है कि सीटों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भले ही तेज हों, लेकिन गठबंधन में बातचीत की प्रक्रिया अभी जारी है। आने वाले दिनों में दोनों पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे पर और मंथन होने की संभावना है।
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में अमेठी की पांच सीटों में से तीन पर सपा ने जीत दर्ज की थी, जबकि दो सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। रायबरेली की पांच विधानसभा सीटों में से चार पर सपा और एक पर भाजपा को जीत मिली थी। इन सीटों में रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा सीट भी शामिल है, जहां से सपा के टिकट पर मनोज पांडे विधायक बने थे। हालांकि, बाद में उन्होंने पार्टी से बगावत कर दी थी। इसी वजह से वह सपा के निशाने पर बताए जा रहे हैं।
अमेठी में भी राकेश प्रताप सिंह को लेकर सपा का रुख सख्त बताया जा रहा है। पार्टी ने ऊंचाहार और राकेश प्रताप सिंह से जुड़ी सीटों को कांग्रेस के लिए छोड़ने से इनकार कर दिया है। सपा की रणनीति इन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर बागी नेताओं को चुनाव में हराने और राजनीतिक संदेश देने की हो सकती है।
दूसरी ओर, हाल के राजनीतिक बदलावों को कांग्रेस अपने लिए अवसर के तौर पर देख रही है। राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते कांग्रेस विधानसभा चुनाव में अधिक सीटें हासिल करना चाहती है। चर्चा है कि पार्टी ने सपा की ओर से जीती गई करीब एक दर्जन सीटों पर भी अपना दावा जताया है। इस मांग को लेकर सपा सहज नहीं है, जिससे दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे पर सहमति बनने में दिक्कत आ रही है।
सीटों के बंटवारे को लेकर पिछले काफी समय से सपा और कांग्रेस के नेताओं की ओर से अलग-अलग बयान सामने आते रहे हैं। इसी बीच पिछले सप्ताह प्रियंका गांधी की उत्तर प्रदेश के नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गईं। दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस ने सपा को 200 विधानसभा सीटों की सूची सौंपी है।
हालांकि, सपा की ओर से इस कथित सूची और सीटों की मांग पर अब तक कोई स्पष्ट रुख सामने नहीं आया है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच सीटों का समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ेगा, यह आने वाले समय में होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा।
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