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समाचारदेश Alert Star Digital Team Dec 23, 2024 10:44 PM

मोहन भागवत के बयान पर रामभद्राचार्य के समर्थन में साधु-संत, कहा- उनकी बात सनातन के खिलाफ

मोहन भागवत के बयान पर रामभद्राचार्य के समर्थन में साधु-संत, कहा- उनकी बात सनातन के खिलाफ

मोहन भागवत के बयान पर रामभद्राचार्य के समर्थन में साधु-संत, कहा- उनकी बात सनातन के खिलाफ

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बीते दिनों एक बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ लोगों को लगता है कि वो नई जगहों पर ऐसे मुद्दों को उठाकर हिंदुओं के नेता बन सकते हैं. इसको लेकर तुलसी पीठ के पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य ने प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि मोहन भागवत एक संगठन के संचालक हैं, वो हिंदू धर्म के संचालक नहीं हैं. रामभद्राचार्य की इस बात का ‘प्रयागराज महाकुंभ’ में पहुंचे साधु-संतों ने समर्थन किया है.साधु-संतों का कहना है कि मोहन भागवत का बयान सनातन धर्म के खिलाफ है. उन्हें अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए. साधु-संतों ने रामभद्राचार्य के अनुशासन वाले बयान का भी समर्थन किया. संतों ने मोहन भागवत पर पलटवार करते हुए कहा कि ये भूमि हमारी है, जहां कहीं भी खुदाई की जाएगी, हर जगह मंदिर और भोलेनाथ का शिवलिंग ही निकलेगा.
मोहन भागवत ने क्या कहा था?
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था, राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ लोगों को लगता है कि वो नई जगहों पर इसी तरह के मुद्दों को उठाकर हिंदुओं के नेता बन सकते हैं. ये स्वीकार्य नहीं है. हर दिन नया मामला उठाया जा रहा है. इसकी इजाजत कैसे दी जा सकती है? भारत को ये दिखाने की जरूरत है कि हम एक साथ रह सकते हैं. राम मंदिर का निर्माण इसलिए किया गया क्योंकि यह सभी हिंदुओं की आस्था का विषय था. धर्म का अनुचित और अधूरा ज्ञान अधर्म की ओर ले जाता है.
रामभद्राचार्य ने क्या कहा था?
इस पर रामभद्राचार्य ने कहा, मोहन भागवत एक संगठन के संचालक हैं. वो हिंदू धर्म के संचालक नहीं हैं. भागवत का बयान अदूरदर्शी है. उनका बयान तुष्टिकरण से प्रभावित है. वो अपनी राजनीति करते हैं. भागवत हिंदू धर्म के बारे में बहुत नहीं जानते हैं. हर व्यक्ति को अपने धर्म के पालन का अधिकार है. उनका बयान दुर्भाग्यपूर्ण है.
रामभद्राचार्य यहीं नहीं रुके. उन्होंने आगे कहा,संघ केवल राजनीति की रोटी सेंकता है. जब संघ नहीं था तब भी हिंदू धर्म था. मंदिर-मस्जिद पर रामभद्राचार्य ने कहा कि हम किसी को छेड़ेंगे नहीं, कोई हमें छेड़ेंगा तो छोड़ेंगे भी नहीं. हमको अपना अधिकार चाहिए बस, उनका अधिकार नहीं चाहिए.
 

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