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समाचारदेशविदेश Alert Star Digital Team Dec 23, 2024 09:29 PM

बांग्लादेश ने की शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने की मांग, भारत ले सकता है ये एक्शन

बांग्लादेश ने की शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने की मांग, भारत ले सकता है ये एक्शन

बांग्लादेश ने की शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने की मांग, भारत ले सकता है ये एक्शन

बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने की आधिकारिक मांग की है. बांग्लादेश के विदेश मामलों और गृह मामलों के सलाहकारों ने इसके बारे में बयान देते हुए कहा है कि भारत को एक डिप्लोमेटिक चिट्ठी लिखी गई है. इस मुद्दे पर भारत ने अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है लेकिन संकेत साफ हैं कि शेख हसीना को वापस नहीं भेजा जाएगा.बांग्लादेश की सरकार ने शेख हसीना पर हत्या सहित कई आरोपों के तहत मुकदमा चलाने के लिए भारत से उनका प्रत्यर्पण मांगा है. इस मांग को बांग्लादेश की राजनीति में मौजूदा अस्थिरता और कट्टरपंथी ताकतों के प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश की सरकार पर कट्टरपंथी गुटों और पाकिस्तान-अमेरिका की रणनीतिक ताकतों का दबाव है. ये गुट शेख हसीना के धर्मनिरपेक्ष शासन और भारत के साथ उनके मजबूत रिश्तों के खिलाफ रहे हैं.
भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि
भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी. इसका उद्देश्य भगोड़े अपराधियों और दोषियों को सौंपने की प्रक्रिया को कानूनी आधार देना था.
भारत का दृष्टिकोण
इस संधि के तहत भारत ने कई अपराधियों को बांग्लादेश को सौंपा है लेकिन शेख हसीना का मामला राजनीतिक और कूटनीतिक है. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत को यह अधिकार है कि वो राजनीतिक विद्वेष के मामलों में प्रत्यर्पण से इनकार कर दे.
भारत का संभावित रुख
पांच अगस्त को तख्तापलट के बाद शेख हसीना ने भारत में शरण ले रखी है. शेख हसीना का प्रत्यर्पण भारत के लिए सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं है. यह एक बड़े कूटनीतिक फैसले का हिस्सा है.राजनीतिक विद्वेष: शेख हसीना को वापस भेजने का अर्थ होगा बांग्लादेश में राजनीतिक प्रतिशोध को बढ़ावा देना.
कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव:शेख हसीना का भारत में रहना यह सुनिश्चित करता है कि बांग्लादेश की कट्टरपंथी ताकतें और उनके समर्थक अपने मकसद में सफल नहीं हो पाएंगे.
द्विपक्षीय संबंध:भारत-बांग्लादेश के संबंध इस समय दोनों देशों के लिए बेहद अहम हैं. भारत अपने पड़ोसी के राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप से बचते हुए भी संतुलित निर्णय लेने की कोशिश करेगा.
जयशंकर की अमेरिका यात्रा और संभावित चर्चा
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर 24 दिसंबर से दो दिन के अमेरिकी दौरे पर होंगे. वहां बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा हो सकती है. अमेरिका का इस वक्त बांग्लादेश पर अत्यधिक प्रभाव है. अमेरिका की बांग्लादेश नीति 20 जनवरी के बाद डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में कैसी रहेगी, भारत इस पर भी करीब से नजर रख रहा है.

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