होम राम मंदिर भूमि के कथित घोटाले को सपा क्यों नहीं बनाना चाहती चुनावी मुद्दा ? जानिए असली वजह
राम मंदिर भूमि के कथित घोटाले को सपा क्यों नहीं बनाना चाहती चुनावी मुद्दा ? जानिए असली वजह
लखनऊ, 19 जून। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को अब कुछ ही महीने बाकी रह गए हैं, ऐसे में यूपी में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ऐलान कर चुके है कि यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में वो छोटे दलों के साथ महागठबंधन बना कर चुनाव लड़ेगे। इसके साथ ही सपा ने ये ऐलान किया है कि यूपी विधानसभा चुनाव 2022 भाजपा बनाम सपा होगा। लेकिन हाल में राम मंदिर जमीन खरीद के कथित घोटाले मामले पर सपा ने चुप्पी साधे रखी, सपा राम मंदिर जमीन घोटाले को क्यों नही बनाना चाहती चुनावी मुद्दा? वन इंडिया को दिए लाइव एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में समाजवादी की राष्ट्रीय प्रवक्ता जूही सिंह ने इसकी खास वजह का खुलासा किया।
राम मंदिर जमीन घोटाले को क्यों नहीं सपा बनाएगी चुनावी मुद्दा ?
सपा राष्ट्रीय प्रवक्ता और सपा की पूर्व मंत्री जुही सिंह ने कहा यूपी विधानसभा चुनाव 2020 में राम मंदिर जमीन घोटाले को सपा इसलिए मुद्दा नहीं बनाएगी क्योंकि राम मनोहर लोहिया, नेता मुलायम सिंह, अखिलेश यादव समेत पार्टी का हर कार्यकर्ता जानता है कि सत्ता अलग है और व्यक्तिगत धर्म अलग है, हम हर धर्म का सम्मान करते हैं। वो हमारे व्यक्तिगत जीवन से ताल्लुक रखता है, वो तय करेगा कि क्या करना है क्या नहीं करना है हम समाज को विभाजित नहीं करना चाहते हैं, इसलिए हमारे लिए कभी ये यूपी का चुनावी मुद्दा था ही नहीं, अगर हम सरकार भी चलाते तो हमारा ये ही प्रयास होता कि हम शांति व्यवस्था बनाए रखे।
आप ने क्या बड़ा मुद्दा सपा से छीन नही लिया है?

जुही सिंह ने कहा योगी सरकार को बेरोजगारी समेत अन्य समस्याओं पर भी ध्यान केन्द्रित करना चाहिए था, राम मंदिर का निर्माण भी जरूरी है। प्रभु राम का मंदिर बनेगा तो हर कोई दर्शन के लिए जाएगा, लेकिन इसको सियासी मुद्दा बनाना न कभी सपा की मानसिकता में था और न कभी रहेगा लेकिन अगर राम मंदिर में कोई घोटाला कर रहा है और जवाब नहीं दिया जा रहा है तो ये भारत के संविधान के विरोध में है और देश के विरोध में है तो सपा इस पर प्रश्न जरूर पूछेगी।
सपा बोली जमीन घोटाला करके भाजपा ने सुचिता खो दी है
सपा राष्ट्रीय प्रवक्ता जुही सिंह ने कहा राम मंदिर की जमीन की खरीद में ये घोटाला करना क्या आवश्यक था जो कि ये ट्रस्ट है, जो बनाया गया है जो भारत का कानून है कागज पर जो लिखा है वो ही सच है। प्रभु राम का हर कोई भक्त है लेकिन राम मंदिर के नाम पर जमीन घोटाला करके भाजपा ने सुचिता खो दी है। ट्रस्ट में अपने व्यक्तिगत लोगों को नियुक्त किया है। पूर्व रिटायर्ड आईएएस नियुक्त हैं तो ऐसा घोटाला क्यों हुआ तो इसका खुलासा होना चाहिए। जनता को ये सवाल पूछना भी चाहिए क्योंकि उसने राम भगवान के नाम पर दान दिया है। आम जनता ने ही नहीं सपा के कार्यकर्ताओं ने भी चंदा नहीं अपनी भक्ति के रूप में ये योगदान दिया है तो उन्हें ये अधिकार नही है सवाल करने का? साक्षी महाराज कह रहे हैं कि जिसको तकलीफ है वो अपना पैसा वापस ले जाए, ये कैसा लोकतंत्र है? ये भाजपा ही बेहतर बताएगी।
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