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गफलत: मृत्यु प्रमाण पत्र पर मौत का कारण ही नहीं, परिजनों को मदद कैसे देंगी सरकारें?
कोरोना महामारी की दूसरी लहर से पूरा देश बेहाल है। महामारी की चपेट से हर दूसरा शख्स परेशान है। ऐसे में केंद्र व राज्य सरकारें कोरोना से जान गंवाने वालों के परिजनों को आर्थिक मदद का एलान कर चुकी हैं। वहीं, अनाथ बच्चों को भी मुआवजा देने की घोषणा की गई है। हालांकि, कई राज्यों में जारी किए जा रहे मृत्यु प्रमाण-पत्रों पर मौत की वजह कोरोना नहीं लिखी जा रही। ऐसे में पीड़ित परेशान हैं कि उन्हें मुआवजा कैसे मिलेगा? गौर करने वाली बात यह है कि आम लोगों के लिए मदद कुछ ही राज्यों में दी जा रही है, जबकि अधिकतर राज्यों में फ्रंटलाइन वर्कर्स को ही मुआवजा देने का एलान किया गया। इस रिपोर्ट में हम आपको बताते हैं कि अब तक किन-किन राज्यों ने आम लोगों को आर्थिक मदद का एलान किया और वहां इसे हासिल करने के लिए किस कदर परेशानी हो रही है।
मध्यप्रदेश: मुआवजा मिलेगा, लेकिन कैसे? मध्य प्रदेश सरकार कोरोना से मौत होने पर पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का एलान कर चुकी है। सरकारी कर्मचारियों की मौत पर यह रकम 5 लाख रुपये है। साथ ही, परिवार के एक सदस्य अनुकंपा नौकरी भी दी जाएगी। हालांकि, अनुकंपा नियुक्ति योजना एक मार्च 2021 से 30 जून 2021 तक और मुआवजा योजना 30 मार्च 2021 से 31 जुलाई 2021 तक ही लागू रहेगी। इसके अलावा मंडी कर्मचारियों की कोरोना से मौत होने पर 25 लाख रुपये मुआवजा राशि देने की घोषणा की गई है। वहीं, पीड़ित परिवार को अलग से 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता व अनाथ हुए बच्चों को 2500 रुपये प्रतिमाह पेंशन और मुफ्त शिक्षा देने की घोषणा भी की गई है। इस बीच भोपाल के सांख्यिकी विभाग के रजिस्ट्रार अभिषेक सिंह ने आदेश जारी किया कि मृत्यु प्रमाण पत्र पर मौत का कारण नहीं लिखा जाएगा। उनका तर्क है कि मौत का कारण डॉक्टर ही बता सकता है। ऐसे में विभाग कारण नहीं लिख सकता। ऐसे में उन लोगों को दिक्कत होना तय है, जिनके परिजनों ने कोरोना से जान गंवाई। सरकार से मुआवजा लेने के लिए उन्हें यह साबित करना मुश्किल होगा कि मौत कोरोना से ही हुई है।
दिल्ली: मदद का एलान, कागजों का व्यवधान दिल्ली में सीएम अरविंद केजरीवाल ने उन मृतकों के परिजनों को 5 लाख तक का मुआवजा देने का एलान किया है, जिनकी मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई। इसके लिए छह सदस्यीय समिति बनाई गई है, जो मुआवजे की राशि तय करेगी। दिल्ली सरकार ने कोरोना से हुई जान गंवाने वाले के परिवार को 50 हजार रुपये की मुआवजा राशि देने की भी घोषणा की है। वहीं, महामारी में अनाथ हुए बच्चों को 25 साल की उम्र तक 2500 रुपये प्रति माह और मुफ्त शिक्षा देने का एलान किया गया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में भी मृत्यु प्रमाण पत्र पर मौत की वजह नहीं लिखी जा रही है।
गोवा में 2 लाख की मदद की घोषणा गोवा सरकार भी कोरोना संकट की मार झेलने वाले गरीब परिवारों की आर्थिक मदद का एलान कर चुकी है। राज्य सरकार ने कहा है कि कमजोर तबके के लोगों या घर के कमाने वाले सदस्य की कोरोना संक्रमण से मौत पर वह पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद देगी।
केंद्र ने किए ये एलान गौरतलब है कि केंद्र ने कोरोना की वजह से जान गंवाने वाले पत्रकारों के करीबी परिजन को वित्तीय सहायता देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार ने कहा है कि वह पत्रकार कल्याण योजना के तहत पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी। बता दें कि केंद्र ने वर्ष 2020 में 41 पत्रकारों के परिवारों को इस योजना के तहत मुआवजा राशि दी थी। वहीं, महामारी के चलते अनाथ हुए बच्चों को पीएम केयर्स फंड से 10 लाख रुपए की सहायता देने की घोषणा की। साथ ही, कहा कि यह रकम बच्चों के नाम से सावधि जमा कराई जाएगी। यह रकम बच्चों को 18 से 23 साल की उम्र के दौरान वजीफे के रूप में मिलेगी या 23 साल का होने पर एकमुश्त दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश ने किया यह एलान उत्तर प्रदेश पंचायत चुनावों में ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले 135 पोल अधिकारियों को यूपी सरकार 30 लाख रुपये का मुआवजा देगी। वहीं, आंगनवाड़ी वर्कर्स की कोरोना से मौत पर सरकार पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये की राशि देगी।
गुजरात भी दे रहा आर्थिक मदद गुजरात सरकार ने अप्रैल 2020 के दौरान फ्रंटलाइन वर्कर्स, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी, रेवेन्यू स्टाफ, फूड सप्लाई डिपार्टमेंट के तहत आने वाले राज्यकर्मियों और राशन की दुकान वालों की कोरोना से मौत होने पर 25 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने की घोषणा की थी। 2021 में कोई नया एलान नहीं किया गया।
हरियाणा में भी फ्रंटलाइन वर्कर्स को मदद हरियाणा में किसी सफाईकर्मी की यदि ड्यूटी के दौरान कोरोना से मौत होती है तो उसके परिजनों को 20 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने की घोषणा की गई है। डॉक्टरों के परिजनों को 50 लाख और पुलिसकर्मियों के परिजनों को 30 लाख रुपये बतौर मुआवजा राशि दिए जा रहे हैं।
अन्य राज्यों की यह है योजना झारखंड में फ्रंटलाइन वॉरियर्स के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने 25 लाख मुआवजा देने प्रावधान किया गया है। वहीं, तमिलनाडु में फ्रंटलाइन वर्कर की कोरोना से मौत होने पर उसके परिवार वालों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का एलान किया गया। इसके अलावा पंजाब ने कोरोना के दौरान जान गंवाने वाले डॉक्टरों और सेहत कामगारों के परिवारों को 50-50 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने की घोषणा की। कोरोना से पत्रकार की मौत पर यह रकम 10 लाख रुपये है। छत्तीसगढ़ में सीएम भूपेश बघेल ने कोरोना से दिवंगत हुए मीडियाकर्मी के आश्रित परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का एलान किया है। अहम बात यह है कि अधिकतर राज्यों में मृत्यु प्रमाण पत्र पर मौत की वजह नहीं लिखी जा रही है। इनमें उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य भी शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी लिया संज्ञान गौरतलब है कि मृत्यु प्रमाण पत्र में इस खामी पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी संज्ञान लिया है। अदालत ने कहा कि राज्यों में एक समान मृत्यु प्रमाण पत्र की नीति का अभाव है, जिसके चलते प्राधिकारी मृत्यु प्रमाण पत्र में मृत्यु का कारण कोविड-19 या कोरोना संक्रमण की जगह दूसरी बीमारियां लिख रहे हैं या उस कॉलम को खाली छोड़ा जा रहा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह संज्ञान अनाथ बच्चों के मामले में लिया। इसमें आम नागरिकों का जिक्र नहीं किया गया।
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