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UP: स्कूल खोलकर सैकड़ों बच्चों के बीच कोविड नियमों को ताक पर रखा
गोरखपुर: तेजी के साथ वायरल हो रहे एक वीडियो की वजह से शिक्षा विभाग के अधिकारियों के होश फाख्ता हो गए हैं. आनन-फानन में अधिकारियों ने वायरल वीडियो की जांच शुरू की, तो पता चला कि गोरखपुर के बांसगांव तहसील के एक प्राइवेट स्कूल में प्रदेश सरकार के निर्देशों को तुगलकी फरमान बताने का काम किया जा रहा है. सैकड़ों बच्चों की भीड़ के बीच ये प्रबंधक जहां कोविड-19 के नियमों को ताक पर रखने की बात कर रहा है, तो वहीं एक अप्रैल से स्कूल खोलने की धमकी भी दे रहा है. केन्द्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जहर उगलता ये प्रबंधक सैकड़ों बच्चों के बीच भाषण देता नजर आ रहा है. उसके इस कृत्य को जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
प्रदेश सरकार के निर्देशों के बताया तुगलकी फरमान
गोरखपुर जनपद के बांसगांव तहसील के एक प्राइवेट स्कूल का वीडियो तेजी के साथ वायरल हो रहा है. इस वीडियो के माध्यम से एक प्रबंधक सैकड़ों की संख्या में मौजूद छात्र-छात्राओं को प्रदेश सरकार के निर्देशों को तुगलकी फरमान बताते हुए कह रहा है कि ''आप सभी बच्चों का विद्यालय फिर से एक बार फिर बंद किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि तेजी के साथ कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं. आपका विद्यालय आज से 31 मार्च तक बंद रहेगा. आप सभी लोगों को बताना चाहेंगे कि यही काम पिछले वर्ष भी हुआ था और एक हफ्ते का लाकडाउन लगाया गया था.
सरकार पर साधा निशाना
जब आपकी वार्षिक परीक्षाएं चल रही थीं और तब से पूरे साल के लिए विद्यालय बंद हो गया. जिससे आपकी पढ़ाई बहुत ज्यादा नुकसान हुई. इस साल जब विद्यालय खुला आपने किताब-कापी अपनी सारी व्यवस्था कर ली. तब हमारी सरकार ने तुगलकी फरमान जारी कर दिया कि विद्यालय बंद होगा. माननीय योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि प्राइवेट विद्यालयों में जो अध्यापक पढ़ाकर अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं. उनके पेट पर लात क्यों मार रहे हैं. इन बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं. जब आप गोरखपुर महोत्सव और अन्य कार्यक्रम करा रहे हैं.
सड़क पर विरोध प्रदर्शन की धमकी
प्राइवेट अध्यापक ने प्रदेश सरकार को चैलेंज देते हुए कहा है कि यदि आपने अपने तुगलकी फरमान को वापस नहीं लिया तो हम इन सारे बच्चों के साथ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का कार्य करेंगे. सरकार खुद नहीं चाहती कि बच्चे पढ़ें और किसी लायक बनें. जब रैली और चुनाव प्रचार करेंगे. तो कोरोना खत्म हो जाता है. लेकिन जब आपको लगेगा कि आप के विपक्ष में लोग खड़े हो रहे हैं, तो आप लोगों को कोरोना का भय दिखाकर पठन-पाठन की प्रक्रिया को बर्बाद करने में लग जाते हैं. पहले सरकार खुद के बनाए नियमों का पालन करें और फिर अन्य लोगों से पालन कराए. तानाशाह रवैया बिल्कुल अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.''
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